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चार सालों में बढ़ा लिंगानुपात, 25 राज्यों में बढ़ी लड़कियों की संख्या

Sun, 23 Jun 2019 09:57 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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देश में 2015-16 की तुलना में जन्म के साथ अखिल भारतीय लिंगानुपात (एसआरबी) यानी प्रति एक हजार पुरुषों की तुलना में लड़कियों की संख्या में वृद्धि हुई है। इस साल मार्च महीने तक 1000 पुरुषों की तुलना में लड़कियों की संख्या बढ़कर 931 हो गई है। वहीं केरल और छत्तीसगढ़ में यह संख्या प्रति एक हजार पुरुषों की तुलना में 959 है। 958 के साथ दूसरा नंबर मिजोरम और 954 के साथ तीसरा नंबर गोवा का है। इस सूची में 900 के साथ पंजाब, 889 के साथ दमन और दीव और 891 के साथ लक्ष्यद्वीप का नंबर आता है।

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2015-16 में प्रति हजार पुरुषों की तुलना में लड़कियों की संख्या 926 थी और 2017-18 के दौरान यह संख्या 929 था। यह आंकड़े महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने सरकार के बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम को लेकर संसद में पूछे गए एक सवाल के जवाब में बताए। 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में 2017-18 के दौरान एसआरबी में वृद्धि हुई है। इसमें सबसे ज्यादा वृद्धि अंडमान और निकोबार में दिखाई दी। यहां पहले प्रति हजार पुरुषों की तुलना में 897 लड़कियां थी जो अब 948 हो गया है।

इसके बाद सिक्किम का नंबर आता है। जहां संख्या 928 से बढ़कर 948 हो गई है। तेलंगाना में लड़कियों की संख्या 925 से बढ़कर 943 हो गई है। वहीं 12 राज्यों में 2017-18 की तुलना में लड़कियों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। इसमें पहला नंबर अरुणाचल प्रदेश का है जहां संख्या 956 से घटकर 914 रह गई है। इसके बाद जम्मू कश्मीर (958 से 943), तमिलनाडु (947 से 936) और महाराष्ट्र (940 से 930) का नंबर आता है। यह संख्या प्रति हजार पुरुषों की तुलना में है। वहीं केरल के साथ छत्तीसगढ़ में एसआरबी में वृद्धि दर्ज की गई।
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2015-16 और 2018-19 के आंकड़ों के बीच तुलना करना पर दिखाई देता है कि 25 राज्यों में लड़कियों की संख्या बेहतर हुई है वहीं 11 राज्यों में घटी है। सिक्किम और अरुणाचल में लड़कियों की संख्या सबसे ज्यादा घटी है। जिन राज्यों में लड़कियों की संख्या बढ़ी है वह हैं- लक्ष्यद्वीप, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, गोवा, नगालैंड, उत्तराखंड, हरियाणा। इन राज्यों में जनवरी 2015 में भाजपा ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरुआत की थी।

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