जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक प्रक्रिया शुरू करने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल के सकारात्मक असर से अलगाववादी बिल्कुल अलग थलग पड़ गए हैं। दशकों से पाकिस्तान की शह पर जम्मू-कश्मीर की सियासत में दखल रखने वाले हुर्रियत कॉन्फ्रेंस समेत सभी अलगाववादी गुटों का घाटी से नामोनिशान मिटाने की जबरदस्त मुहिम चलाई जा रही है।
केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि प्रदेश में शुरू हुई नई सियासी प्रक्रिया में पाकपरस्ती का नारा लगाने वालों को महंगी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
इस मामले में व्यापक योजना पर काम कर रही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल की टीम पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) प्रमुख महबूबा मुफ्ती के पाकिस्तान संबंधी बयान के मद्देनजर ऐसे लोगों पर पैनी नजर रख रही है जो पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर फायदा पहुंचा सकते हैं। उधर प्रदेश के सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं में मौजूद 100 से ज्यादा लोग प्रशासन की रडार पर हैं जो अलगाववाद के नाम पर युवाओं को भड़का रहे हैं।
पिछले महीने उपराज्यपाल के आदेश पर कुपवाड़ा के सरकारी मिडिल स्कूल के टीचर इद्रीश जान को भारत विरोधी गतिविधियों के लिए बर्खास्त किया गया है।
साथ ही उधमपुर के गवर्मेंट डिग्री कॉलेज ऑफ विमेन के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अब्दुल बारी नायक को युवाओं को कट्टरवाद का मंत्र पढ़ाने के आरोप में नौकरी से निकाला गया है।
इसी तरह पुलवामा के नायब तहसीलदार नजीर अहम वानी को अलगाववाद और आतंकवाद को प्रश्रय देने के लिए नौकरी से हाथ धोना पड़ा। अलगाववादियों के साथ कश्मीर की जमात-ए-इस्लामी जैसी धार्मिक कट्टरवादी संस्था भी सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर हैं।
सूत्रों ने बताया कि इस काम के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (एलटीएफ) बनाया गया है जो व्यापक योजना पर काम कर रही है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और सीबीआई जैसी एजेंसियां अब बिना किसी दखलअंदाजी के प्रदेश में काम कर रहे हैं जिसका अलगाववादियों पर जबरदस्त प्रभाव पड़ा है।
दूसरी तरफ मीरवाइज उमर जैसे सभी अलगाववादी नेता लंबे समय से नजरबंद हैं जिनके इशारे पर कट्टरवादी जुमे की नमाज में इकट्ठा होकर भारत विरोधी नारे लगाते थे। इनकी सरपरस्ती में पत्थरबाजी करने वाले युवा भी अब शांत बैठे हैं।
महबूबा ने की शरद यादव से मुलाकात
पाकिस्तान से बेहतर रिश्तों का राग अलापने वाली जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने शुक्रवार सुबह शरद यादव से उनके आवास पर मुलाकात की। सूत्रों ने बताया कि दोनों के बीच पीएम के साथ हुई सर्वदलीय बैठक को लेकर चर्चा हुई।
वहीं यादव की बेटी और कांग्रेस नेता सुभाषिनी ने इसे शिष्टाचार भेंट करार दिया। दरअसल गुपकार में शामिल दलों के पाकिस्तान से वार्ता के मुद्दे पर साथ न देने से महबूबा प्रदेश की सियासत में अलग थलग पड़ गई हैं।
वह अब उन वरिष्ठ नेताओं से संपर्क कर रही हैं जो उनके पिता के करीबी रहे हैं। बताते हैं कि उन्होंने शरद से सर्वदलीय बैठक पर चर्चा कर इसके नफे नुकसान पर बात की। बैठक से कोई लाभ होगा, इसे लेकर वह शुरू से ही आशावान नहीं है।
यही कारण है कि वह अपने तर्कों से राजनीतिक मजबूती देना चाहती हैं। बताते हैं कि शरद ने भी पूर्ण राज्य के दर्जे को बहाल करने और वहां के लोगों के हितों के लिए मिलकर केंद्र सरकार पर दबाव बनाने के कुछ टिप्स दिए हैं।