सड़क दुर्घटना (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : Amar Ujala
सुरक्षा एजेंसियों ने तमिलनाडु बंदरगाह पर प्रतिबंधित रसायन की खेप पकड़ी है। इसे चीन से कराची ले जाया जा रहा था। अधिकारियों ने बताया कि रसायन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित है। इसका इस्तेमाल आंसू गैस और दंगा नियंत्रण के लिए किया जाता है।
अधिकारियों ने बताया कि पाकिस्तान लगातार चीन की मदद से प्रतिबंधित रसायन और जैविक युद्ध कार्यक्रम पर काम कर रहा है। 18 अप्रैल 2024 को चीन के शंघाई बंदरगाह से चाइनीज कंपनी चेंगदु शिचेन ट्रेडिंग कंपनी ने रावलपिंडी की रक्षा उपकरण आपूर्तिकर्ता कंपनी रोहेल इंटरप्राइजेज के लिए ऑर्थो-क्लोरो बेंज़िलिडीन मैलोनोनिट्राइल रसायन की खेप हुंडई शंघाई जहाज से भेजी थी।
अफसरों ने कहा कि जहाज में साइप्रस झंडे के नीचे कुल 2560 किलोग्राम रसायन 25-25 किलोग्राम के 103 ड्रमों में भरकर रखा गया था। कराची जा रहा यह जहाज आठ मई 2024 को तमिलनाडु के कट्टुपल्ली बंदरगाह पर पहुंचा। यहां कस्टम अधिकारियों ने रसायन को जांच के लिए रोक लिया। इस पर भारत की निर्यात सूची शामिल स्कोमेट रसायन का नाम लिखा था। इसके बाद विशेषज्ञों के सहयोग से रसायन की जांच की गई। इसमें प्रतिबंधित रसायन ऑर्थो-क्लोरो बेंज़िलिडीन मैलोनोनिट्राइल पाया गया। यह रसायन वासेनर व्यवस्था के तहत प्रतिबंधित है। इसके बाद रसायन की खेप को कस्टम एक्ट और सामूहिक विनाश और हथियार प्रणाली एक्ट के तहत सीज किया गया।
मार्च में भी पकड़ी गई थी खेप
सुरक्षा एजेंसियों ने मार्च में भी मुंबई के न्हावा शेवा बंदरगाह से चीन से कराची जा रहे एक जहाज से रसायन की खेप जब्त की थी। यह खेप पाकिस्तान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम के लिए ले जाई जा रही थी।