क्या है आईएल एंड एफएस- कोहिनूर सीटीएनएल मामला?
राज ठाकरे से कोहिनूर सीटीएनएल इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी में आईएल एंड एफएस द्वारा 450 करोड़ रुपये की इक्विटी निवेश और कर्ज से जुड़ी कथित अनियमियतताओं की जांच के सिलसिले में पूछताछ हो रही है।
कोहिनूर सीटीएनएल कंपनी दादर में कोहिनूर टॉवर्स के निर्माण का काम कर रही है। ईडी इस कंपनी की शेयर होल्डिंग और उसके निवेश की बारीकी से जांच कर रही है। उन्मेष जोशी, राज ठाकरे और उनके एक अन्य सहयोगी ने कोहिनूर मिल्स नंबर 3 को खरीदने के लिए एक कन्सोर्टियम गठित किया था।
आईएल एंड एफएस समूह ने भी इसमेें बड़ी रकम निवेश की थी। इस समूह ने कंपनी में 225 करोड़ रुपये का निवेश किया था लेकिन 2008 में बड़े नुकसान का सामना करते हुए महज 90 करोड़ रुपये में अपने शेयर बेच दिए।
राज ठाकरे ने भी उसी साल अपने शेयर बेच दिए और कंसोर्टियम से बाहर निकल गए। अपने शेयरों को बेचने के बावजूद भी आईएल एंड एफएस समूह ने कोहिनूर सीटीएनएल को अडवांस लोन दिया, जिसे कथित तौर पर कोहिनूर सीटीएनएल नहीं चुका पाया। साल 2011 में 500 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाने के लिए कोहिनूर सीटीएनएल कंपनी ने अपनी कुछ संपत्तियां बेचने के समझौते पर हस्ताक्षर किए।
इस समझौते के बाद आईएल एंड एफएस समूह ने कोहिनूर सीटीएनएल को 135 करोड़ रुपये का और कर्ज दे दिया। बता दें अब उन्मेष का कोहिनूर ग्रुप कोहिनूर सीटीएनएल को नहीं चलाता है। यह कंपनी प्रभादेवी की कपनी हो गई है। ईडी का आरोप है कि आईएल एंड एफएस के बड़े अधिकारियों ने बिना किसी जांच के विभिन्न निजी कंपनियों के जरिए कर्ज बांटा है। आरोप है कि खराब वित्तीय हालात से जूझ रही कंपनियों को भी कर्ज दिया गया। साथ ही कर्ज देने के लिए पर्याप्त कोलैटरल नहीं लिया गया था।