रामपुर सदर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में 33.94 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच मुख्य मुकाबला है। दोनों दलों ने एक दूसरे पर चुनाव प्रक्रिया में बाधा डालने का आरोप लगाया है।
लोकतंत्र में चुनावों की अपनी शुचिता होती है और इसकी प्रक्रिया रोकी नहीं जा सकती। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को यह टिप्पणी तब की जब एक वकील ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश की रामपुर सदर विधानसभा सीट पर पांच दिसंबर को उपचुनाव के दौरान मतदाताओं को पुलिस द्वारा पीटे जाने और उन्हें घरों से बाहर नहीं निकलने दिया गया। साथ ही उन्होंने मतगणना रोकने की मांग भी की।
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इस पर सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने व्यक्तिगत रूप से पेश हुए वकील से कहा कि विषय को बृहस्पतिवार सुबह उल्लेखित किया जाए। पीठ ने कहा कि ‘देखिये, लोकतंत्र में चुनाव का अपना महत्व है और इसकी प्रक्रिया नहीं रोकी जा सकती।' गौरतलब है कि वकील ने खुद को पुलिस उत्पीड़न का चश्मदीद बताया है क्योंकि वह उसी विधानसभा क्षेत्र के मतदाता हैं।
वकील ने अदालत के समक्ष कहा कि यह एक असाधारण परिस्थिति है जो दो दिन पहले रामपुर सदर में उपचुनाव के दौरान पैदा हुई थी। मतदान के दौरान पुलिस द्वारा मतदाताओं को पीटा गया था और उन्हें वोट डालने से रोका गया। इतना ही नहीं, पुलिसकर्मियों के साथ झड़प में मैं भी घायल हो गया था।
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इस पर पीठ ने वकील से मतदान और मतगणना का दिन पूछा। इसका जवाब देते हुए जब वकील ने कहा कि मतगणना बृहस्पतिवार को होनी है तो न्यायालय ने कहा कि 'माफ कीजिए, हम इस तरह का आदेश जारी नहीं कर सकते। आपकी याचिका कहां है?आप कल सुबह विषय का उल्लेख करिये।’
गौरतलब है कि रामपुर सदर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में 33.94 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच मुख्य मुकाबला है। दोनों दलों ने एक दूसरे पर चुनाव प्रक्रिया में बाधा डालने का आरोप लगाया है।