सुप्रीम कोर्ट ने एक महिला से दुष्कर्म के आरोपी एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के बाद कार्यवाही को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि अब तक की गई जांच से पता चला है कि शिकायत गलत थी और यह कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग था। शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के नवंबर 2019 के आदेश को चुनौती देते हुए मई 2012 में सेवा से सेवानिवृत्त हुए व्यक्ति द्वारा दायर अपील की अनुमति दी। हाई कोर्ट ने मामले में कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया था।
न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश की पीठ ने कहा कि महिला ने शीर्ष अदालत के समक्ष पेश होने का विकल्प नहीं चुना। याचिकाकर्ता एक वृद्ध व्यक्ति है और प्रतिवादी संख्या दो (महिला) के नियोक्ता द्वारा उसके बेटे के खिलाफ दी गई इसी तरह की शिकायत सही नहीं पाई गई। पीठ ने पिछले सप्ताह पारित अपने आदेश में कहा कि मौजूदा मामले में भी अब तक की गई जांच से पता चलता है कि शिकायत गलत है। यह स्पष्ट रूप से कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
पीठ ने कहा कि हम इस अपील की अनुमति देते हैं और 26 फरवरी, 2018 की प्राथमिकी के बाद हुई कार्यवाही को रद्द करते हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता को दुष्कर्म सहित भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधान के तहत दंडनीय अपराधों के मामले में एक आरोपी के रूप में रखा गया था।