केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने दावा किया है कि कोरोना की तीसरी लहर के बीच प्रवासी मजदूर अपने घरों को वापस नहीं लौट रहे हैं। मंत्रालय ने उन मीडिया रिपोर्ट्स को सिरे से नकार दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि महामारी के प्रभाव से बचने के लिए बड़ी संख्या में कामगार शहरों से अपने गांव लौटने लगे हैं।
श्रम मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें पूरे घटनाक्रम पर नजर रख रही हैं और किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं। बयान में कहा गया- कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में मजदूरों के लौटने की खबरें छपी हैं, जो कि सच नहीं हैं। ऐसी रिपोर्टिंग पुरानी तस्वीरों के आधार पर की गई।
केंद्रीय श्रम सचिव सुनील बरथवाल ने कोरोना महामारी से बिगड़ती स्थिति को लेकर बुधवार को सभी राज्यों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक की और प्रवासी मजदूरों को लेकर की गई व्यवस्थाओं और तैयारियों की जानकारी ली।
इस बैठक में राज्य सरकारों ने सूचित किया कि अधिक संक्रमण वाले इलाकों में रात्रिकालीन कर्फ्यू और सप्ताहांत कर्फ्यू के अलावा किसी भी तरह की पाबंदियां नहीं लगाई गई हैं। निर्माण एवं कारोबारी गतिविधियां पहले की ही तरह चल रही हैं। इस दौरान राज्यों ने कहा कि इन सीमित पाबंदियों की वजह से प्रवासी श्रमिकों के बड़े पैमाने पर अपने गृह-राज्य लौटने की कोई असामान्य घटना नहीं देखी गई है।