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सुप्रीम कोर्ट: 20 साल की शादी में एक दिन भी साथ नहीं रहे पति-पत्नी, अदालत ने दिया ये फैसला 

Mon, 13 Sep 2021 08:47 PM IST
Amit Mandal पीटीआई, नई दिल्ली

सार

इस मामले में अदालत ने पाया कि महिला का बर्ताव सही नहीं था। ये शादी 2002 में हुई थी और पति-पत्नी एक दिन भी साथ नहीं रहे। अदालत ने इसे लेकर अहम टिप्पणी की।   
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ani
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विस्तार
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सु्प्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक ऐसी शादी को खत्म माना जिसमें दो दशक से दंपति साथ ही नहीं रह रहा था। शादी के बाद से ही पति-पत्नी एक दिन भी साथ नहीं रहे। अदालत ने कहा कि ऐसा लगता है कि इस मामले में टेक ऑफ से पहले ही क्रैश लैंडिंग हो गई। 

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शीर्ष अदालत ने इस मामले में तलाक को मंजूरी देते हुए कहा कि अनुच्छेद 142 के तहत शादी को खत्म माना जा सकता है। संजय किशन कौल और ऋषिकेश रॉय की खंडपीठ ने पाया कि 2002 में हुई शादी को बचाने के सभी प्रयास विफल साबित हुए। ऐसा लगता है कि टेक ऑफ की स्थिति से पहले ही क्रैश लैंडिंग हो गई। 

सहायक प्रोफेसर के रूप में काम करने वाले पति ने अदालत को बताया कि किन परिस्थितियों में ऐसा हुआ। पति ने कहा कि उसकी पत्नी ने शादी की रात उससे कहा था कि उसकी मर्जी के बिना ही शादी हुई है इसलिए वह जा रही है। 
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अदालत ने पाया कि महिला का बर्ताव सही नहीं था, उसने पति के खिलाफ अदालत में कई मामले दाखिल किए और पति के खिलाफ कॉलेज अधिकारियों तक भी पहुंची और पति के खिलाफ अनुशासनात्मक कदम उठाने की मांग की। ये एक तरह से क्रूर बर्ताव माना जाएगा। 

अदालत ने कहा, मुख्य बात यह है कि ये शादी शुरुआत से नाकाम रही। इसमें शादी जैसा कुछ नहीं था और पति-पत्नी लंबे समय से साथ भी नहीं रह रहे थे। दोनों एक दिन के लिए भी साथ नहीं रहे। करीब 20 साल तक दोनों अलग-अलग रहे। हिंदू कानून के मुताबिक शादी दो आत्माओं का मिलन है तलाक को भारतीय समाज आसानी से स्वीकार नहीं करता।    

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