सार
स्थानांतरण की मांग इस आधार पर की गई है कि वरिष्ठ वकील, जिन्हें लखनऊ में मामले की बहस करनी है, वे आमतौर पर इलाहाबाद में रहते हैं। उनकी उम्र अधिक है, इसलिए वे बहस के लिए लखनऊ नहीं जा सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने आज यूपी सरकार की अपील को लखनऊ से इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने से इनकार कर दिया। केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा ने 20 साल पुराने हत्या के मामले में उन्हें बरी किए जाने के खिलाफ दायर याचिका को हस्तांतरित करने का आग्रह किया था।
प्रधान न्यायाधीश यूयू ललित और जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी की पीठ को बताया गया कि स्थानांतरण की मांग इस आधार पर की गई है कि वरिष्ठ वकील, जिन्हें लखनऊ में मामले की बहस करनी है, वे आमतौर पर इलाहाबाद में रहते हैं। उनकी उम्र अधिक है, इसलिए वे बहस के लिए लखनऊ नहीं जा सकते हैं।
इस पर पीठ ने कहा कि यदि वरिष्ठ वकील लखनऊ आने में असमर्थ हैं तो उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दलीलें पेश करने की अनुमति देने के अनुरोध पर हाईकोर्ट विचार कर सकती है। हम इस तरह के मामलों पर विचार नहीं करते हैं। 10 नवंबर को होने वाली अपील की सुनवाई को लेकर हाईकोर्ट से आग्रह किया जा सकता है।
यह मामला वर्ष 2020 में लखीमपुर खीरी में 24 साल के प्रभात गुप्ता की हत्या से जुड़ा है। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा के खिलाफ इस मामले में मुकदमा चला था और वे 2004 में दोषमुक्त करार दिए गए थे। इसके खिलाफ यूपी सरकार ने अपील दायर की थी, वहीं, मृतक के परिवार ने भी फैसले को चुनौती देते हुए अलग याचिका दायर की थी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा पारित प्रशासनिक आदेश के खिलाफ मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। हाईकोर्ट ने अपील को लखनऊ से इलाहाबाद स्थानांतरित करने की प्रार्थना को खारिज कर दिया था।