मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने ज्ञानवापी मस्जिद की प्रबंधन समिति अंजुमन इंतजामिया की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी की दलीलों पर गौर किया जिसके बाद अपने आदेश में सुधार किया और विशेष पैराग्राफ को हटा दिया।
हुजेफा ने मामले का जिक्र करते हुए कहा कि 24 जुलाई की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने मस्जिद परिसर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के सर्वेक्षण पर रोक लगाने की मांग करने वाली अंतरिम याचिका के बजाय मुख्य याचिका का निपटारा कर दिया ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि यह मंदिर पर बना है या नहीं।
पीठ ने कहा, 'आदेश 7 नियम 11 के खिलाफ अपील का निपटारा कर दिया गया है, हालांकि इस पर बहस नहीं हुई। हमने केवल एएसआई सर्वेक्षण बिंदु पर जोर दिया है और मामला इलाहाबाद उच्च न्यायालय के समक्ष है और वहां यह तर्क दिया जा सकता है कि हमारी अपील खारिज कर दी गई है।' एएसआई के सर्वेक्षण पर रोक लगाकर अंतरिम याचिका पर राहत देते हुए शीर्ष अदालत ने 24 जुलाई को मुख्य मामले का निपटारा कर दिया।'
शीर्ष अदालत ने 24 जुलाई को एएसआई द्वारा यह तय करने के लिए विस्तृत वैज्ञानिक सर्वेक्षण पर 26 जुलाई को शाम पांच बजे तक रोक लगा दी थी कि क्या वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर के बगल में स्थित मस्जिद मंदिर पर बनी थी। उत्तर प्रदेश सरकार और एएसआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आज पीठ से कहा कि उन्हें आदेश में सुधार पर कोई आपत्ति नहीं है।
मुख्य याचिका में मस्जिद समिति ने वाराणसी जिला अदालत में हिंदू पक्षकार के मुकदमे को सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 7 नियम 11 (सी) के तहत खारिज करने की मांग करते हुए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। सोमवार को मस्जिद समिति ने एएसआई के काम पर रोक लगाने की मांग करने वाली लंबित याचिका में अपनी अंतरिम याचिका के साथ शीर्ष अदालत का रुख किया।