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SC: लुप्तप्राय 'ग्रेट इंडियन बस्टर्ड' को बचाने के लिए तैयार करें योजना, शीर्ष अदालत का केंद्र को आदेश

Fri, 19 Jan 2024 06:01 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Supreme Court: सर्वोच्च न्यायालय ने लुप्तप्राय पक्षी ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को बचाने के लिए केंद्र को निर्देश दिए हैं। ्अदालत ने सरकार से कहा कि इसके लिए वह व्यापक योजना तैयार करे। इसके अलावा, सरकार से एक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को भी कहा गया है। 
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सर्वोच्च न्यायालय, लुप्तप्राय पक्षी जीआईबी। - फोटो : अमर उजाला।
सर्चोच्च न्यायालय ने शुक्रवार केंद्र सरकार से कहा कि वह ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (जीआईबी) को बचाने के लिए एक व्यापक योजना तैयार करे। लुप्तप्राय जीआईबी राजस्थान का राज्य पक्षी भी है। इसे 'गोडावण' के नाम से भी जाना जाता है। जीआईबी खासतौर पर राजस्थान और गुजरात में पाए जाते हैं। प्रकृति के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय संघ (आईयूसीएन) की साल 2021 की रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रजाति विलुप्ति की कगार पर है और अब मुश्किल से 50 से 249 ही पक्षी बचे हैं। 
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ग्रेट इंडियन बस्टर्ड - फोटो : सोशल मीडिया
केंद्र हमें आगे का रास्त बताए: सर्वोच्च न्यायालय
शीर्ष अदालत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा, 'हम चाहते हैं कि केंद्र हमें आगे के रास्ते के बारे में बताए। नहीं तो हम अंधेरे में ही हाथ पैर मारते रहेंगे।' शीर्ष अदालत ने केंद्र से यह भी जानना चाहा कि क्या वैज्ञानिक अध्ययनों पर आधारित ऐसा कोई आंकड़ा है कि ये पक्षी बिजली के तारों से टकराकर भी मरते हैं।'
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न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़। - फोटो : पीटीआई (फाइल)
सीजेआई ने बर्ड डायवर्टर को लेकर पूछा सवाल
सीजेआई ने पूछा, क्या हमारे पास कोई ऐसे प्रमाणिक आंकड़े हैं, जिनमें जीआईबी को बिजली के तारों से बचाने वाले बर्ड डायवर्टर के प्रभाव का अध्ययन किया गया हो। ओवरहेड बिजली की लाइन पर बर्ड डायवर्टर का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि पक्षियों को टकराने से रोका जा सके। सीजेआई ने कहा कि अब केंद्र सरकार को आगे का रास्ता तय करना होगा। शीर्ष अदालत पहले अपना फैसला दे चुकी है। 
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जीआईबी, बिजली की लाइन। - फोटो : सोशल मीडिया
उर्जा संयंत्रों की जरूरत पर दाखिल करें रिपोर्ट
उन्होंने कहा, मैं बर्ड डायवर्टर को लेकर बहुत आश्वस्त नहीं हूं। बर्ड डायवर्टर कितने असर कारक हैं, क्या केंद्र के पास इसके आंकड़े हैं? पीठ ने कहा, हम अटॉर्नी जनरल से आगे का रास्ता पूछ रहे हैं। हमें बताएं कि क्या किया जा सकता है। पीठ ने कहा, सरकार हमें आगे का रास्ता बताए। जीआईबी के संरक्षण की जरूरत है। इसने कहा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रतिबद्धता को ध्यान में रखते हुए उर्जा संयंत्रों की आवश्यकता को बताने वाली एक विस्तृत स्थिति रिपोर्ट अदालत में दाखिल की जाए। 
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