सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) हो या जीएसटी टैक्स कलेक्शन, हर मानक पर साफ दिखाई पड़ रहा है कि देश की अर्थव्यवस्था सुधर रही है। आयात की तुलना में निर्यात बढ़ने के आंकड़े भी यही तस्वीर पेश कर रहे हैं। इसका सीधा असर देश में नौकरियों के अवसरों में दिखाई पड़ने लगा है। एसबीआई की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अप्रैल-जून की तिमाही में कुल 30.74 करोड़ लोगों को नौकरी मिली है। इसमें 16.3 लाख लोग ऐसे हैं जिन्होंने अपने करियर में पहली नौकरी हासिल की है। यानी कुल नौकरियों का आधे से अधिक ऐसे युवाओं को गया है जिन्होंने पहली बार काम करना शुरू किया है।
ईपीएफओ और एनपीएस की रिपोर्ट के आधार पर दावा किया गया है कि अगर अर्थव्यवस्था में तेजी का यही रुख बना रहा तो इस साल वित्त वर्ष 2021-22 में 50 लाख से ज्यादा पहली बार नौकरी करने वाले युवाओं को जॉब्स में अवसर मिल सकता है। पिछले वर्ष में यही आंकड़ा 44 लाख के करीब रहा था। कोरोना की पहली लहर में पूर्ण लॉकडाउन लगाने से अर्थव्यवस्था चौपट हो गई थी। उस दौरान करोड़ों लोगों को अपनी रोजी-रोटी से हाथ धोना पड़ा था।
लेकिन कोरोना महामारी की दूसरी लहर में पहली लहर की तरह पूर्ण लॉकडाउन लगाने का निर्णय नहीं किया गया, जिसका असर यह हुआ कि इस दौरान भी अर्थव्यवस्था में आवश्यक सेवाएं लगातार चलती रहीं और अर्थव्यवस्था को अपेक्षाकृत काफी कम नुकसान हुआ। इसके साथ ही कोविड की दूसरी लहर में पहली के मुकाबले श्रमिकों की भागीदारी में भी अपेक्षाकृत काफी कम कटौती हुई। बता दें कि अप्रैल, मई और जून के महीने में संक्रमण की दूसरी लहर अपनी पीक पर थी, लेकिन इसके बाद भी इसी दौरान 28.9 लाख पहली बार ईपीएफ लाभ लेने वाले लाभार्थियों को रजिस्टर किया गया था।
क्यों हुआ ऐसा
आर्थिक विशेषज्ञ और भाजपा प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने अमर उजाला से कहा कि देश की अर्थव्यवस्था हर मोर्चे पर बेहतर कर रही है। देश की जीडीपी का बढ़ना बताता है कि अर्थव्यवस्था के हर बड़े क्षेत्र में देश प्रगति कर रहा है। इसी दौरान जीएसटी कलेक्शन भी बढ़ा जो जीडीपी की बढ़ोतरी की पुष्टि कर रहा है। इसका सीधा लाभ नौकरियों पर पड़ना तय माना जाता है। उद्योगपति अपना व्यापार बढ़ाने के लिए ज्यादा से ज्यादा लोगों को नौकरी दे रहे हैं।
अग्रवाल ने बताया कि किसी भी उद्यम में कर्मचारियों को रखने में एक अघोषित, लेकिन निश्चित नियम यह अपनाया जाता है कि इसमें कम वेतनमान वाले युवाओं की संख्या सबसे ज्यादा होती है। मध्यम और उच्च तकनीकी दक्ष कर्मचारियों के माध्यम से इनसे अपेक्षित कार्य लिया जाता है। इस दृष्टि से देखें तो कुल नौकरियों में पहली बार नौकरी करने वाले युवाओं की संख्या बिल्कुल उचित दर पर बढ़ रही है।
आगे और नौकरियों के आसार कैसे हैं?
एसबीआई की रिपोर्ट के अनुसार अर्थव्यवस्था की यह गति इसी प्रकार बनी रहती है तो इस वर्ष कुल मिलाकर 50 लाख से ज्यादा युवाओं को पहली बार नौकरी मिल सकती है। चूंकि, केंद्र सरकार के साथ-साथ विभिन्न राज्य सरकारें इस समय बुनियादी ढांचे के विकास में तेजी से निवेश कर रही हैं, लिहाजा नौकरियों में यह बढ़त लगातार बरकरार रहने के आसार हैं। ऑटो सेक्टर के उत्पादों के निर्यात में तेजी, कृषि-दुग्ध प्रसंस्कृत उत्पादों के निर्यात में तेजी, इलेक्ट्रिक-सौर ऊर्जा संचालित उपकरणों के उत्पादन जैसे अनेक क्षेत्रों में तेजी बरकरार रहने की उम्मीद है जो नौकरियों के क्षेत्र में बड़ा अवसर प्रदान कर सकते हैं।