महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के कार्यकर्ता हिंदुत्व विचारक विनायक दामोदर सावरकर पर टिप्पणी के विरोध में शुक्रवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी को बुलढाणा जिले के शेगांव में काले झंडे दिखाएंगे। औरंगाबाद से मनसे कार्यकर्ता शेगांव जाएंगे, जहां गांधी की भारत जोड़ो यात्रा शुक्रवार को पहुंचनी है। राहुल गांधी ने गुरुवार को महाराष्ट्र के अकोला जिले के वडेगांव में संवाददाता सम्मेलन में सावरकर की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने ब्रिटिश शासकों की मदद की थी और डर के मारे उन्हें दया याचिका लिखी थीं।
दो दिन पहले कांग्रेस नेता यह भी कहा था कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रतीक सावरकर हैं। राहुल के इस बयान पर विरोध शुरू हो गया है। मनसे की औरंगाबाद इकाई के अध्यक्ष सुमीत खांबेकर ने एक विज्ञप्ति में कहा कि शुक्रवार सुबह करीब आठ बजे मनसे कार्यकर्ता शेगांव के लिए रवाना होंगे और वहां राहुल गांधी को काले झंडे दिखाएंगे।
आजादी के पहले 1942 के ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में हिस्सा लेने वाली लीलाबाई चितले (93) गुरुवार को कुछ समय के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में शामिल हुईं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने महाराष्ट्र के अकोला जिले की बालापुर तहसील के वडेगांव में पैदल मार्च में शामिल हुईं चितले का एक वीडियो संदेश ट्वीट किया। रमेश ने ट्वीट में कहा, वह चाहती हैं कि यात्रा संविधान बचाने पर केंद्रित हो।
वीडियो संदेश में चितले ने कहा, 9 अगस्त 1942 को मैं बारह साल की थी। महात्मा गांधी ने ‘करो या मरो’ का नारा दिया था...मैं और मेरी दो सहेलियां एक कॉलेज के पास (अंग्रेजों के खिलाफ) नारे लगाते हुए पकड़े गए थे। हम सिर्फ 12 साल के थे, इसलिए हमें उसी शाम (पुलिस द्वारा) छोड़ दिया गया। लेकिन मेरे पिता और भाई साढ़े तीन साल जेल में रहे। देश को आजादी उस तरह नहीं मिली, जैसी आज बताई जाती है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में समाज के सभी वर्गों और धर्मों के लोगों ने भाग लिया था। ये लोग (भारत जोड़ो यात्रा में भाग लेने वाले) संविधान को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।