आज जाति की राजनीति चरम पर है। सरदार पटेल इसके सख्त विरोधी रहे और ऐसी सोच को विकास की राह का रोड़ा मानते थे। इतिहासकार उर्विश कोठारी बताते हैं कि सरदार पटेल व उनके बड़े भाई बैरिस्टर व स्वतंत्रता आंदोलनकारी विठ्ठलभाई पटेल जब लंदन में वकालत पढ़ रहे थे तो वहां बसे पटेल जाति के व्यवसायियों ने उनका सम्मान करना चाहा तो उन्होंने जातिविशेष के इस निमंत्रण को सख्ती से ठुकरा दिया।