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भारत बंद के बाद जोश में किसान: बोले- अब आंदोलन को छोटा दिखाने की कोशिश नहीं करेगी भाजपा सरकार

सार

मोर्चा के वरिष्ठ सदस्य अविक साहा ने बताया, एक बार एमएसपी न मिले, खेत खाली रह गए, फसल खराब हो जाए या कोई दूसरा नुकसान, किसान एक-दो बार यह सब झेल लेगा। वह इसलिए कि जमीन तो उसकी है। अगले साल मेहनत करके ज्यादा पैदावार ले सकता है। मोदी सरकार ने जो कानून पास किए हैं, उनके द्वारा तो किसान से उसकी जमीन का मालिकाना हक ही छिन जाएगा...
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जयपुर में भारत बंद के दौरान रैली निकालते प्रदर्शनकारी - फोटो : पीटीआई
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किसान आंदोलन का नेतृत्व कर रहे 'संयुक्त किसान मोर्चा' के सदस्यों का कहना है, सोमवार के 'भारत बंद' से केंद्र की भाजपा सरकार की आंखें खुल गई हैं। उम्मीद है कि अब भाजपा सरकार, किसान आंदोलन को छोटा दिखाने की कोशिश नहीं करेगी। मोर्चा के वरिष्ठ सदस्य अविक साहा ने बताया, अभी तक सरकार की शब्दावली में 'किसान आंदोलन' को ऐसे शब्द सुनने को मिल जाते थे कि ये तो दो-चार प्रदेशों के किसानों का आंदोलन है। आगे ऐसा नहीं होगा। किसानों को उम्मीद है कि सरकार बातचीत करेगी। साढ़े तीन बजे तक किसान संगठनों से मिली रिपोर्ट बताती है कि 22 राज्यों में 'भारत बंद' का असर देखा गया है।

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लोकतंत्र में सभी को अपनी बात रखने का हक है। निर्वाचित सरकार का फर्ज है कि वह अपने नागरिकों की बात गौर से सुनें। ऐसा न हो कि एक कान से सुन लिया और दूसरे से निकाल दिया। अविक साहा कहते हैं, अगर सच्चे लोकतंत्र की बात हो रही है तो उसे बचाने की जिम्मेदारी जितनी आम लोगों की है, उतनी ही सरकार की भी है। किसानों को यही भरोसा था कि सरकार उनकी बात सुनेगी, मगर नहीं। सरकार ने तो किसानों का मजाक बनाकर रख दिया। तीन काले कृषि कानून बनाकर किसानों के अस्तित्व को ही खत्म करने की साजिश रच दी गई।

देश में किसान के एमएसपी को लेकर दशकों से आंदोलन होते रहे हैं। कभी देशव्यापी आंदोलन की जरुरत नहीं पड़ी। हां, समय-समय पर बड़ी रैलियां, जन सभाएं और महापंचायतें, सरकार के कान खोलने के लिए होती रही हैं। किसान के पास और क्या है। जमीन है अगर अब वही नहीं बचेगी तो वह कहां जाएगा। मजदूर बन जाएगा। केंद्र सरकार के मौजूदा तीनों काले कानून, किसान की जमीन तक को खत्म करा देंगे। देश के लोगों का गुस्सा इसी बात को लेकर है कि किसान तो पहले से ही दबा कुचला है और अब उसकी जमीन पर हाथ डाला जा रहा है।

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अविक साहा ने कहा, एक बार एमएसपी न मिले, खेत खाली रह गए, फसल खराब हो जाए या कोई दूसरा नुकसान, किसान एक दो बार यह सब झेल लेगा। वह इसलिए कि जमीन तो उसकी है। अगले साल मेहनत करके ज्यादा पैदावार ले सकता है। मोदी सरकार ने जो कानून पास किए हैं, उनके द्वारा तो किसान से उसकी जमीन का मालिकाना हक ही छिन जाएगा। इसके बाद किसान कहां जाएगा। दिहाड़ी मजदूर बनकर अपनी जमीन पर खेती करेगा। दस माह बहुत होते हैं। खैर जो भी हो, भारत बंद की सफलता ने केंद्र को बता दिया है कि लंबे समय तक देश के किसानों के साथ दुश्मनी ठीक नहीं है।  

किसान संगठनों को उम्मीद है कि अब सरकार सोचेगी। इस आंदोलन में साढ़े छह सौ किसान शहीद हो गए हैं। हमारे देश में तो बिना बलिदान के सरकार सुनती ही नहीं है। अब बलिदान भी दे दिया है। देश के दूसरे राज्यों के अलावा मणिपुर, मिजोरम और सिक्किम तक में भारत बंद की गूंज सुनाई दी है। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा, 'भारत बंद' पूरी तरह सफल रहा है। भाजपा तो पहले से यह मानने को तैयार नहीं है कि देश में कोई आंदोलन भी चल रहा है। हमें किसानों का पूरा समर्थन मिला है। किसानों ने आम लोगों की दिक्कतों को ध्यान में रखा है। पूरे देश को सील नहीं किया जा सकता। हमें लोगों का जीवन संकट में नहीं डालना है। किसान संगठन, केंद्र सरकार से बातचीत के लिए तैयार हैं। ये तय है कि जब तक सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती, किसान पीछे नहीं हटेंगे।
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