अविक साहा ने कहा, एक बार एमएसपी न मिले, खेत खाली रह गए, फसल खराब हो जाए या कोई दूसरा नुकसान, किसान एक दो बार यह सब झेल लेगा। वह इसलिए कि जमीन तो उसकी है। अगले साल मेहनत करके ज्यादा पैदावार ले सकता है। मोदी सरकार ने जो कानून पास किए हैं, उनके द्वारा तो किसान से उसकी जमीन का मालिकाना हक ही छिन जाएगा। इसके बाद किसान कहां जाएगा। दिहाड़ी मजदूर बनकर अपनी जमीन पर खेती करेगा। दस माह बहुत होते हैं। खैर जो भी हो, भारत बंद की सफलता ने केंद्र को बता दिया है कि लंबे समय तक देश के किसानों के साथ दुश्मनी ठीक नहीं है।
किसान संगठनों को उम्मीद है कि अब सरकार सोचेगी। इस आंदोलन में साढ़े छह सौ किसान शहीद हो गए हैं। हमारे देश में तो बिना बलिदान के सरकार सुनती ही नहीं है। अब बलिदान भी दे दिया है। देश के दूसरे राज्यों के अलावा मणिपुर, मिजोरम और सिक्किम तक में भारत बंद की गूंज सुनाई दी है। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा, 'भारत बंद' पूरी तरह सफल रहा है। भाजपा तो पहले से यह मानने को तैयार नहीं है कि देश में कोई आंदोलन भी चल रहा है। हमें किसानों का पूरा समर्थन मिला है। किसानों ने आम लोगों की दिक्कतों को ध्यान में रखा है। पूरे देश को सील नहीं किया जा सकता। हमें लोगों का जीवन संकट में नहीं डालना है। किसान संगठन, केंद्र सरकार से बातचीत के लिए तैयार हैं। ये तय है कि जब तक सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती, किसान पीछे नहीं हटेंगे।