समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अमीक जामेई ने अमर उजाला से कहा कि संजय निषाद को जो बंगला अलॉट किया गया है, वह पहले लोहिया ट्रस्ट के लिए निर्धारित किया गया था। लेकिन योगी आदित्यनाथ की सरकार आने के बाद इस बंगले को लोहिया ट्रस्ट से वापस ले लिया गया और इसे सरकार के सहयोगी दल को अलॉट कर दिया गया...
समाजवादी पार्टी ने कहा है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं को असली समाजवादी नेता बताते रहे हैं। लेकिन इसी असली समाजवादी नेता के शासनकाल में राममनोहर लोहिया की मूर्ति का अपमान हो रहा है और प्रदेश सरकार चुप्पी साधे हुए है। पार्टी ने मांग की है कि राममनोहर लोहिया की उस मूर्ति को सम्मान के साथ जनता के लिए खोला जाना चाहिए, जिसे भाजपा सरकार के सहयोगी संजय निषाद के आवास पर लकड़ी के तख्तों के बीच बंद कर दिया गया है।
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समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अमीक जामेई ने अमर उजाला से कहा कि संजय निषाद को जो बंगला अलॉट किया गया है, वह पहले लोहिया ट्रस्ट के लिए निर्धारित किया गया था। लेकिन योगी आदित्यनाथ की सरकार आने के बाद इस बंगले को लोहिया ट्रस्ट से वापस ले लिया गया और इसे सरकार के सहयोगी दल को अलॉट कर दिया गया। लेकिन इस मामले में दुर्भाग्यपूर्ण बात यह हुई है कि इस बंगले में स्थित राममनोहर लोहिया की मूर्ति को लकड़ियों के तख्ते से ढक दिया गया है। यह समाजवाद का सपना देखने वाले राममनोहर लोहिया का अपमान है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं को विधानसभा में सच्चा लोहियावादी और सच्चा समाजवादी बता चुके हैं। उनका दावा है कि उनकी सरकार की हर योजना समाज के सभी गरीब वर्ग के लोगों के लिए होती है, लिहाजा वे लोहिया के सच्चे समर्थक हैं। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दावा सही है तो उन्हें राममनोहर लोहिया की मूर्ति का अपमान नहीं होने देना चाहिए और इस बंगले में स्थित मूर्ति को गरिमापूर्ण ढंग से लकड़ियों के तख्ते से बाहर रखते हुए जनता के लिए खोल देना चाहिए।
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अमीक जामेई ने कहा कि अखिलेश यादव ने राममनोहर लोहिया का सपना साकार किया था और उसी सपने को सच करते हुए प्रवीण निषाद को संसद में भेजा था। ऐसे में प्रवीण निषाद को भी राममनोहर लोहिया की मूर्ति का अपमान बर्दाश्त नहीं करना चाहिए। स्वयं को ‘सोशलिस्ट मॉन्क’ कहलाने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्याथ को इस पर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
क्यों हुआ विवाद?
दरअसल, अखिलेश यादव सरकार में लोहिया ट्रस्ट की जिम्मेदारी शिवपाल यादव के पास हुआ करती थी। मुख्यमंत्री निवास के पास स्थित यह बंगला बेहद महत्त्वपूर्ण हुआ करता था और समाजवादी पार्टी से जुड़े लोग यहां आया-जाया करते थे। लेकिन यूपी में भाजपा की सत्ता आने के बाद इसे लोहिया ट्रस्ट से वापस ले लिया गया। बाद में योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस बंगले को अपने सहयोगी निषाद पार्टी के संजय निषाद को अलॉट कर दिया।
आरोप है कि इसी समय बंगले में स्थित राममनोहर लोहिया की मूर्ति को ढक दिया गया। हालांकि, सत्तारूढ़ दल का कहना है कि जब संजय निषाद इस बंगले में रहने के लिए आए, तो यह मूर्ति पहले से ढकी हुई थी। लेकिन इस मूर्ति को किसने ढका, इस पर सभी मौन हैं।