अयोध्या में बनने वाले भगवान राम के मंदिर की नींव में देश के सभी पवित्र स्थलों से लाई गई मिट्टी डाली जाएगी। इस तरह मंदिर निर्माण में देश के सभी पवित्र स्थानों की भूमिका सुनिश्चित की जा रही है। इसी क्रम में शुक्रवार को दिल्ली के 11 पवित्र स्थानों की मिट्टी पीतल के कलशों में भरकर अयोध्या भेजी गई। इसे पांच अगस्त को निर्माण के दिन मंदिर की नींव में डाला जाएगा। मंदिर निर्माण के लिए देश की प्रमुख नदियों का जल भी एकत्र किया जा रहा है, उसे भी नींव में अर्पित किया जाएगा।
जिन 11 जगहों से मिट्टी ली गई है उनमें सिद्धपीठ कालका जी, पांडव कालीन पुराने किले के पास बने भैरव मंदिर, गुरुद्वारा शीशगंज, गौरीशंकर मंदिर चांदनी चौक, श्री दिगंबर जैन लाल मंदिर चांदनी चौक, हनुमान मंदिर कनाट प्लेस, प्राचीन शिव नवग्रह मंदिर कनाटप्लेस, प्राचीन काली माता मंदिर बांग्लासाहिब, श्री लक्ष्मीनारायण बिरला मंदिर, भगवान वाल्मीकि मंदिर, मंदिर मार्ग और बद्री भगत झंडेवालान मंदिर करोलबाग शामिल हैं। मंदिर निर्माण की आधारशिला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रखेंगे।
विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ पदाधिकारी कपिल खन्ना ने अमर उजाला को बताया कि हिंदू धर्म शास्त्रों में कोई भी शुभकार्य करने के पहले पृथ्वी मां से अनुमति लेने का प्रावधान है। देश की सभी नदियों से जल और सभी प्रमुख धार्मिक तीर्थों से मिट्टी लेकर राममंदिर की नींव में डालने का यही प्रयोजन है। इसके आलावा, इस मंदिर के जरिए संपूर्ण भारत की एकात्मकता का संदेश पूरे विश्व में जाएगा, इस दृष्टि से भी मंदिर निर्माण में पूरे राष्ट्र की सहभागिता सुनिश्चित करने का अभियान चलाया जाएगा।
कपिल खन्ना ने कहा कि जल्दी ही भारत के पांच लाख गांवों और दस करोड़ हिंदू परिवारों से मंदिर निर्माण हेतु दान लेने का यज्ञ शुरू किया जाएगा। इस तरह मंदिर निर्माण में पूरे समुदाय की भागीदारी तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि कुछ व्यापारिक घरानों ने इसके लिए अकेले निर्माण करने की प्रस्तावना दी थी, लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया गया क्योंकि विहिप यह संदेश नहीं जाने देना चाहता कि इस मंदिर की स्थापना किसी व्यक्ति या संगठन विशेष के जरिए की गई।