केरल के मुख्यमंत्री पी. विजयन ने मंगलवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर के निर्णय पर रोक नहीं लगाई है। ऐसे में हमारी सरकार को कानून विशेषज्ञों से सलाह लेकर निर्णायक फैसला करना होगा। सरकार ने 15 नवंबर को इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए सभी दलों की एक बैठक भी बुलाई है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट के पुनर्विचार करने का निर्णय लेने पर मंदिर के पुजारियों समेत भाजपा, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने खुशी जताई है। मंदिर के तंत्री कंडारू राजीवारू ने पुनर्विचार के निर्णय को बड़ी जीत बताते हुए इसे भगवान अयप्पा के आशीर्वाद और उनके भक्तों की प्रार्थना का असर बताया।
केंद्रीय मंत्री केजे अल्फोंस ने कहा, ये बहुत अच्छा निर्णय है। मेरे विचार में केरल इस मुद्दे पर एक था। लोकतंत्र में आम जनता सर्वोपरि और प्रमुख महत्व रखते हैं। केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता रमेश चेन्नीथला ने कहा, माकपा नेतृत्व वाली एलडीएफ सरकार को परिपक्वता दिखानी चाहिए और आने वाले दो महीने लंबे तीर्थ सीजन में निर्णय (सुप्रीम कोर्ट के) को लागू नहीं करना चाहिए।
उधर, माकपा के राज्य महासचिव कोदियारी बालकृष्णन ने कहा, इस पहाड़ी धर्मस्थल में महिलाओं के प्रवेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट का जो भी निर्णय होगा, सरकार उसे लागू करेगी। सरकार स्थिति की समीक्षा कर रही है और उचित निर्णय करेगी।
केरल हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह विशेष पूजा के लिए सबरीमाला मंदिर के कपाट खोले जाने पर हुई हिंसक घटनाओं को लेकर सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने भगवान अयप्पा के इस मंदिर का प्रबंधन संभालने वाले त्रावणकोर देवासम बोर्ड (टीडीबी) से अगले सप्ताह तक इन घटनाओं को लेकर जवाब तलब किया है।
जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन की अध्यक्षता वाली डिविजन पीठ ने यह निर्देश सबरीमाला के विशेष आयुक्त की रिपोर्ट को देखने के बाद लिया, जिसमें आयुक्त ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बावजूद अयप्पा भक्तों द्वारा महिलाओं को जबरन रोकने का जिक्र किया था। बता दें कि पिछली बार मंदिर पर हुई हिंसा में 546 मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें 3700 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।