सबरीमाला मंदिर से जुड़ा त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड एक बार फिर विवादों में है। इस बार उसकी ओर से जारी अधिसूचना का विरोध करते हुए केरल हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है।
सबरीमाला मंदिर में मुख्य पुजारी पद पर आवेदन मामला
त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड की अधिसूचना में कहा गया है कि सबरीमाला मंदिर में मुख्य पुजारी पद के लिए केवल मलयाली ब्राह्मण ही आवेदन कर सकते हैं। याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया है कि वे त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड के जारी अधिसूचना से वह दुखी है।
इसके जरिए एक खास जाति के पुजारियों को ही सबरीमाला और मलिकप्पुरम मंदिरों में मेलसंथी के पद के लिए आवेदन करने को कहा गया है। अधिसूचना में कहा गया था कि सबरीमाला और मलिकप्पुरम में केवल ‘मलयाली ब्राह्मण’ ही प्रधान पुजारी के पद पर आवेदन करने के हकदार हैं।
याचिका सिजिथ टीएल और विजीश पीआर ने अधिवक्ता टीआर राजेश के माध्यम से दायर की है। याचिका में कहा गया है कि अधिसूचना में केवल केरल मूल के मलयाली ब्राह्मण ही सबरीमाला और मलिकप्पुरम मंदिरों में मेलसंथी के रूप में नियुक्त होने के लिए आवेदन करने के हकदार हैं, इस तरह की अधिसूचना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 के तहत प्रदत्त मूल अधिकारों का उल्लंघन है।
बता दें कि केरल के सबरीमाला में भगवान अयप्पा मंदिर पांच दिन के पारंपरिक मासिक पूजन के लिए आज से 21 जुलाई के बीच खुला रहेगा। अधिकतम 5000 भक्तों को कोविड -19 वैक्सीन की दोनों खुराक या फिर आरटीपीसीआर टेस्ट के साथ ही मंदिर में प्रवेश की अनुमति है। ये टेस्ट मंदिर में प्रवेश से 48 घंटे पहले होने चाहिए। मंदिर में प्रवेश करने के लिए ऑनलाइन बुकिंग करानी होगी।
श्रद्धालुओं को वैक्सीन सर्टिफिकेट या निगेटिव आरटीपीसीआर टेस्ट रिपोर्ट के साथ ऑनलाइन बुकिंग करने की सुविधा मिलेगी। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कहा कि सबरीमाला मंदिर में प्रवेश उन लोगों के लिए होगा, जिन्हें या तो वैक्सीन की दोनों खुराक मिली हैं या जिनकी आरटीपीसीआर टेस्ट निगेटिव है।