भारत सरकार ने साफ किया है कि रूसी मूल के हीरों पर जी7 देशों ने जो फैसला लिया है, इस फैसले से भारत के व्यापार पर न्यूनतम असर पड़ेगा। जी-7 देशों ने हीरों के आयात पर प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया है।
रूसी मूल के हीरों के सीधे आयात पर प्रतिबंध लगाने का फैसला हुआ है। जी7 देशों के इस फैसले से भारत के हीरा व्यापार पर न्यूनतम प्रभाव पड़ेगा। सरकार ने शुक्रवार को यह बयान दिया। वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने कहा, भारतीय अधिकारी इस मुद्दे पर लगातार G7 तकनीकी टीम के संपर्क में हैं। सचिव के अनुसार, आयात के दौरान केवल एक ही जगह पर हीरों की जांच जैसे कुछ मुद्दों को हल करने में कामयाबी भी मिली है।
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बता दें कि G7 नेताओं ने एक जनवरी, 2024 से रूस में खनन, संसाधित या उत्पादित गैर-औद्योगिक हीरों के आयात पर प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया गया है। इसके बाद एक मार्च, 2024 से तीसरे देशों में संसाधित रूसी हीरों के आयात पर चरणबद्ध प्रतिबंध लगाए जाएंगे।
वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने कहा कि जब तक भारत में हीरों की प्रोसेसिंग नहीं हो जाती तब तक उसकी जांच नहीं की जानी चाहिए। भारत कच्चे हीरों पर नज़र रख सकता है। उन्होंने कहा, इस लिहाज से शायद यह हमारे हीरा उद्योग के लिए एक राहत है। उन्हें दोबारा जांच से नहीं गुजरना पड़ेगा।
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वाणिज्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव विपुल बंसल ने इस मामले में कहा कि भारत G7 की तकनीकी टीम के संपर्क में है। भारत इस हीरे के कारोबार में प्रमुख हितधारक है, ऐसे में हमारी प्रमुख चिंताओं का समाधान कर दिया गया है। उन्होंने कहा, जी7 के बयान के मुताबिक एक मार्च से एक कैरेट या उससे अधिक के रूसी हीरे स्वीकार नहीं किए जाएंगे। एक सितंबर से इसे घटाकर 0.5 कैरेट कर दिया जाएगा।