ऑपरेशन गंगा के अंतर्गत यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों को बाहर निकालने की कोशिशें जारी हैं। भारत सरकार ने अपने सर्वोच्च मंत्रियों-अधिकारियों को जिम्मेदारी देकर छात्रों को जल्द से जल्द बाहर निकालने के लिए कहा है। लेकिन यूक्रेन में भारी संख्या में फंसे छात्रों को अचानक बाहर निकालना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है। छात्रों ने शिकायत की है कि उनके लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं रह गए हैं। उन्हें बॉर्डर पार करने में परेशानी आ रही है। उनके पास खाने-पीने के सामान तक खत्म हो गए हैं। कुछ छात्रों ने यूक्रेनी अधिकारियों द्वारा अपने साथ दुर्व्यवहार करने की भी शिकायतें की हैं। छात्रों ने जल्द से जल्द सरकार से उन्हें बाहर निकालने में मदद देने की मांग की हैं और इसके लिए दूतावास के अधिकारियों से अपील की है, लेकिन अभी तक उन्हें मदद का कोई आश्वासन नहीं मिला है।
छात्रों ने शिकायत की है कि यूक्रेनी अधिकारी अब उनके साथ अभद्र व्यवहार भी कर रहे हैं। बॉर्डर एरिया से बाहर निकलने के समय कई अधिकारियों ने छात्रों की पिटाई की है और अभद्र भाषा में बात की है। माना जा रहा है कि संयुक्त राष्ट्र में भारत ने जिस तरह रूस के विरोध में अपना तेवर कड़ा नहीं किया है, उससे यूक्रेन के लोगों में नाराजगी है और अधिकारियों का व्यवहार उसी का एक परिणाम हो सकता है। हालांकि, यूक्रेन ने एक बार फिर भारत से बातचीत कर मामला सुलझाने की पहल करने का अनुरोध किया है।
छात्रों के पास मोबाइल से अपने परिवारों के साथ संपर्क करना भी कठिन होता जा रहा है। बहुत सारे छात्रों के मोबाइल की बैटरी डाउन हो गई है। वे रास्ते में कहीं रूककर बस स्टैंड में अपने मोबाइल की बैटरी चार्ज कर रहे हैं, तो भारी संख्या में होने के कारण ज्यादातर छात्रों को यह सुविधा भी नहीं मिल पा रही है। कुछ जगहों पर कनेक्शन न मिलने की समस्या भी आ रही है। इंटरनेट के बाधित होने से छात्र अपने परिवारों के साथ संपर्क भी नहीं बना पा रहे हैं। जिन लोगों के पास कुछ सुविधा बची हुई है, उसके द्वारा वे अपने परिवार और दूतावास तक संदेश भेज रहे हैं, लेकिन छात्रों का आरोप है कि अभी तक उनके पास मदद नहीं पहुंच पाई है।
यूक्रेन में व्यापार कर रहे अतुल सेठ ने अमर उजाला को बताया है कि यूक्रेन में संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। छात्रों की बड़ी संख्या जल्द से जल्द बाहर निकलने की कोशिश कर रही है, लेकिन विमानों की सीमित संख्या सभी छात्रों को बाहर निकालने में बाधा बन रही है। भारी संख्या में छात्र यूक्रेन के अंदर के इलाकों तक फैले हुए हैं। उनका एयरपोर्ट तक आना भी टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। ज्यादातर फ्यूल स्टेशंस पर ईंधन मिलने में भी परेशानी आ रही है, लिहाजा वे अपने घरों से एयरपोर्ट तक भी नहीं पहुंच पा रहे हैं।