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आरएसएसः 'सनातन धर्म के खिलाफ अपमानजनक बयान देने से पहले इसे समझ लेना चाहिए', विवाद पर संघ ने कही बड़ी बात

Sat, 16 Sep 2023 06:09 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे

सार

संघ नेता ने कहा कि सनातन का मतलब शाश्वत है और यह भारत के अध्यात्मिक जीवनचर्या का आधार है। इसी के चलते भारत ने आकार लिया।
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डा. मनमोहन वैद्य - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सनातन धर्म को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संयुक्त महासचिव मनमोहन वैद्य ने शनिवार को कहा कि जो लोग सनातन धर्म को खत्म करने की बातें कर रहे हैं, उन्हें ऐसी बयानबाजी से पहले इसकी परिभाषा समझनी चाहिए। पुणे में संघ की समन्वय बैठक हुई। इस बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए मनमोहन वैद्य ने कहा कि भारत एक अध्यात्मिक लोकतंत्र है।
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'सनातन धर्म को पहले समझना चाहिए'
बता दें कि हाल ही में डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन और ए राजा ने दावा किया था कि सनातन धर्म, समाज में बंटवारे को बढ़ावा देता है, इसलिए इसे खत्म हो जाना चाहिए। उन्होंने इसकी तुलना डेंगू, मलेरिया और कोरोना वायरस से की थी। इस पर खूब हंगामा हुआ और जमकर राजनीतिक बयानबाजी हुई। जब इस बारे में संघ के नेता मनमोहन वैद्य से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि कुछ लोग सनातन धर्म को खत्म करने की बात कर रहे हैं लेकिन क्या ये लोग इसका सही मतलब भी जानते हैं। उन्हें ऐसे शब्द बोलने से पहले सनातन धर्म की परिभाषा को भी समझना चाहिए। 

संघ नेता ने कहा कि सनातन का मतलब शाश्वत है और यह भारत के अध्यात्मिक जीवनचर्या का आधार है। इसी के चलते भारत ने आकार लिया। मनमोहन वैद्य ने डीएमके नेताओं को राजनीतिक कहकर खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि इतिहास में कई लोगों ने सनातन धर्म को खत्म करने की कोशिश की लेकिन असफल रहे। भगवान कृष्ण ने कहा था कि जब भी धर्म पर संकट आएगा तो वह अवतार लेंगे। आरएसएस भी उसी राह पर चल रहा है। 
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देश के नाम के विवाद पर क्या बोले संघ नेता
देश के नाम को लेकर जारी विवाद पर वैद्य ने कहा कि भारत नाम में सभ्यतागत मूल्य हैं। दुनिया में कोई देश नहीं है, जिसके दो नाम हो, इसलिए भारत को भारत कहा जाना चाहिए। संघ की इस बैठक में आरएसएस से संबंद्ध 36 संगठनों के 250 प्रतिनिधि शामिल हुए। इस दौरान महिला सशक्तिकरण, स्वदेशी को बढ़ावा, पारिवारिक मूल्यों को बढ़ावा, सांप्रदायिक सद्भाव और आरएसएस के विस्तार के मुद्दों पर चर्चा हुई।  

मनमोहन वैद्य ने कहा कि आरक्षण का समर्थन किया और कहा कि समाज में कुछ तबकों से भेदभाव किया गया, इसलिए आरक्षण के जरिए उन तबकों को लाभ दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद से देश अपनी सांस्कृतिक पहचान पर धीरे-धीरे खड़ा हो रहा है। देश की विदेश, रक्षा और शिक्षा नीतियों में भी बड़े बदलाव हुए हैं। दुनिया भी इन बदलावों को देख रही है। अब सभी मानते हैं कि देश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। 
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