कांस्टेबल ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर से तीन लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ितों ने बकाया भुगतान के कारण कांस्टेबल को दूध देने से मना कर दिया था जिसके बाद उनसे गोली मार दी।
झारखंड की एक अदालत ने गुरुवार को एक निलंबित आरपीएफ कांस्टेबल को एक गर्भवती महिला सहित रेलवे कुली के परिवार के तीन सदस्यों की हत्या करने के आरोप में मौत की सजा सुनाई। कांस्टेबल ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर से तीन लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ितों ने बकाया भुगतान के कारण कांस्टेबल को दूध देने से मना कर दिया था जिसके बाद उनसे गोली मार दी।
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घटना 17 अगस्त 2018 को रामगढ़ जिले के बरकाकाना पुलिस चौकी क्षेत्र की रेलवे कॉलोनी में हुई थी। रेलवे कुली अशोक राम, उसकी पत्नी लीला देवी, गर्भवती पुत्री मीना देवी की हत्या और राम को घायल करने के मामले में अतिरिक्त जिला न्यायाधीश रामगढ़ शेषनाथ सिंह की अदालत ने पवन कुमार सिंह को मौत की सजा सुनाई। सरकारी वकील आर बी राय ने कहा कि एक और बेटी सुमन कुमारी और बेटा चिंटू कुमार है।
आर बी राय ने कहा कि अदालत ने तिहरे हत्याकांड को 'दुर्लभतम' मामला बताया और आदेश दिया कि आरोपी पवन कुमार सिंह को मृत्यु तक फांसी दी जाए। अभियोजन पक्ष ने कांस्टेबल के लिए मृत्युदंड की मांग करते हुए कहा था कि यात्रियों और रेलवे संपत्ति की सुरक्षा के लिए उसे रिवॉल्वर दी गई थी, लेकिन उसने इसका इस्तेमाल एक गर्भवती महिला सहित एक परिवार के तीन सदस्यों की हत्या के लिए किया।
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चिंटू कुमार ने अस्पताल में दर्ज अपने बयान में कहा था कि उसके पिता रेलवे की नौकरी के अलावा दूध का कारोबार करते हैं और उसी कॉलोनी में रहने वाला आरपीएफ कांस्टेबल उनका ग्राहक था। जब उन्होंने बकाया भुगतान के कारण उसे दूध देने से मना कर दिया, तो आरपीएफ कांस्टेबल ने परिवार के सदस्यों पर गोली चला दी। पवन सिंह को तुरंत ड्यूटी से निलंबित कर दिया गया और बाद में उन्हें बिहार में उनके पैतृक गांव से गिरफ्तार कर लिया गया।