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संशोधित बाल यात्रा मानदंड: बीते सात वर्षों में रेलवे ने की 2800 करोड़ से ज्यादा कमाई, RTI के जवाब में खुलासा

Tue, 19 Sep 2023 10:26 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारतीय रेलवे ने बीते सात साल में बाल यात्रियों से 2,800 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त राजस्व अर्जित किया है। बाल यात्रा किराया नियमों में संशोधन किया गया था। एक आरटीआई के जवाब में यह जानकारी दी गई है। 
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Indian Railways - फोटो : iStock
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विस्तार
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भारतीय रेलवे ने बीते सात साल में बाल यात्रियों से 2,800 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त राजस्व अर्जित किया है। बाल यात्रा किराया नियमों में संशोधन किया गया था। एक आरटीआई के जवाब में यह जानकारी दी गई है। 

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सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र (क्रिस) के जवाब से इस बात का इशारा मिलता है कि संशोधित मानदंडों के कारण अकेले 2022-23 के वित्तीय वर्ष में रेलवे ने 560 करोड़ रुपये कमाए, जिससे यह सबसे लाभदायक साल बन गया।

रेल मंत्रालय के तहत सीआरआईएस एक संगठन है, जो टिकटिंग और यात्रियों, माल ढुलाई सेवाओं, ट्रेन यातायात नियंत्रण और संचालन जैसे मुख्य क्षेत्रों में आईटी समाधान प्रदान करता है। 31 मार्च, 2016 को मंत्रालय ने घोषणा की कि रेलवे 5 से 12 साल तक की उम्र के बच्चों के लिए पूर्ण वयस्क किराया लेगा, यदि वे आरक्षित कोच में अलग बर्थ या सीट चुनते हैं। संशोधित नियम 21 अप्रैल, 2016 से लागू किए गए थे।

इससे पहले रेलवे 5 से 12 साल के बच्चों को अलग बर्थ की पेशकश करता था, जबकि यात्रा किराया केवल आधा वसूलता था। हालांकि, संशोधित मानदंड में इस आयु वर्ग के बच्चों को आधे किराए पर यात्रा करने की अनुमति दी गई है, लेकिन उन्हें अलग बर्थ या सीट नहीं मिलती है और उन्हें उस वयस्क की सीट पर समायोजित किया जाना होता है जिसके साथ वे यात्रा कर रहे हैं।
 

सीआरआईएस ने वित्तीय वर्ष 2016-17 से 2022-23 तक के बच्चों के किराये के विकल्पों के आधार पर दो श्रेणियों के वर्षवार आंकड़े सारणीबद्ध रूप में उपलब्ध कराए हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि इन सात वर्षों में 3.6 करोड़ से अधिक बच्चों ने आरक्षित सीट या कोच का चयन किए बिना आधा किराया देकर यात्रा की। दूसरी ओर 10 करोड़ से अधिक बच्चों ने एक अलग बर्थ/सीट का विकल्प चुना और पूरे किराए का भुगतान किया।
 
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आरटीआई आवेदक चंद्र शेखर गौड़ ने कहा, 'जवाब से यह भी पता चलता है कि रेलवे से यात्रा करने वाले कुल बच्चों में से लगभग 70 फीसदी पूरा किराया देना पसंद करते हैं और उन्हें बर्थ या सीट मिलती है।'
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