रियल एस्टेट में अब काले धन को सफेद बनाने की कोशिशें कामयाब नहीं हो सकेंगी। अब किसी भी प्रोजेक्ट की 70 फीसदी राशि बैंक में रखनी होगी और काले धन को इसमें शामिल करना आसान नहीं होगा। रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) विधेयक, 2015 के पारित होने के बाद बिल्डरों पर कानूनी शिकंजा कसा जा सकेगा। रियल एस्टेट क्षेत्र के विनियमन की इस कोशिश में कई बाधाएं सामने आईं। सेलेक्ट कमेटी के सदस्यों पर बिल्डर लॉबी ने दबाव भी बनाया था।
इससे पहले यूपीए शासनकाल में इसका प्रारूप तय कर रही तत्कालीन मंत्री कुमारी शैलजा को भी कई तरह के दबाब झेलने पड़े थे। सेलेक्ट कमेटी के अनिल माधव दवे ने संकेतों में स्पष्ट किया है कि जब वह इस विधेयक के लिए संशोधनों को तैयार करने के क्रम में पूरे देश में घूम रहे थे तब कई स्थानों पर उन्हें कई तरह के पावर का सामना करना पड़ा। कहीं बंगलूरू पावर था कहीं कुछ और ताकत थी। पूर्व मंत्री कुमारी शैलजा ने इस पर सहमति जताते हुए कहा कि अनुमान लगाया जा सकता है कि उन्हें कितने तरह के दबाबों से जूझना पड़ा होगा जब वह इस बिल की बुनियाद तैयार कर रही थी।
रियल एस्टेट के मामले में धर्म और खानपान की आदतों के कारण कोई भेदभाव नहीं किया जा सकेगा। शहरी विकास मंत्री ने सदस्यों की चिंताओं के मद्देनजर इस प्रावधान को नए कानून की नियमावली में शामिल करने का एलान किया है।
साथ ही सारी स्वीकृतियों के लिए सिंगल विंडो प्रणाली होगी ताकि सौदे के क्रम में खरीददारों को इधर-उधर भटकने को मजबूर न होना पड़े। वैंकेया ने स्पष्ट किया है कि नया कानून किसी के खिलाफ नहीं है बल्कि इसके तहत रियल एस्टेट क्षेत्र को नियमित किया जा रहा है।
प्रावधानों के उल्लंघन पर पहले चेतावनी फिर सजा
ट्रिब्यूनल द्वारा तय प्रावधानों के उल्लंघन पर प्रमोटरों को तीन साल की सजा या जुर्माना या दोनों झेलना पड़ सकता है। एजेंटों के लिए एक साल की सजा का प्रावधान है। पहले चेतावनी दी जाएगी। फिर जुर्माना होगा और इसके बाद भी सुधार नहीं हुआ तो सजा झेलनी पड़ेगी। विवादों के निपटारे के लिए 60 दिन की अवधि तय की गई है।
प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन के मानक को कम कर सकते हैं राज्य
विधेयक में प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन के लिए 500 वर्गमीटर क्षेत्रफल और आठ अपार्टमेंट का मानक तय किया गया है लेकिन राज्यों को यह अधिकार दिया गया है कि वे इस सीमा को और कम कर सकते हैं। इससे छोटे बिल्डर भी दायरे में आ सकेंगे और कम आय वाले छोटे घरों के खरीददारों को भी फायदा मिल सकेगा। राज्य स्तरीय रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी किसी प्रोजेक्ट के समय पर पूरा होने और उसे ग्राहकों को सौंपे जाने की प्रक्रिया पर निगरानी रखेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2022 तक सबके लिए घर अभियान को नए कानून से मदद मिल सकेगी।
हर साल 10 लाख लोग खरीदते हैं घर
हर साल दस लाख लोग घर खरीदते हैं और इस क्षेत्र में 3.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश होता है। पिछले पांच वर्षों में 27 बड़े शहरों में प्रति वर्ष 2,349 से 4,488 आवासीय प्रोजेक्ट लांच हुए। इस तरह इन 27 शहरों में पांच साल में 17,526 प्रोजेक्ट लांच हुए जिसमें 13,69,820 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। वैंकेया ने कहा वर्तमान मेें 76,044 कंपनियां रियल सेक्टर में काम कर रही हैं।