ब्याज दर अचानक बढ़ाने पर आलोचनाओं के बीच आरबीआई ने कहा कि कई वैश्विक तूफान एक साथ आने की वजह से बिना पूर्व कार्यक्रम के नीतिगत दरों में बढ़ोतरी का फैसला लिया गया। केंद्रीय बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बुधवार को मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक का ब्योरा जारी कर कहा कि नीतिगत दरों (मौद्रिक नीति कार्रवाइयों) में अचानक बढ़ोतरी का उद्देश्य लगातार बढ़ रही महंगाई को कम करना है।
ब्याज दर बढ़ाने में देरी पर केंद्रीय बैंक की आलोचन उचित नहीं : सुब्बाराव
पूर्व आरबीआई गवर्नर डी सुब्बाराव ने बुधवार को कहा कि किसी भी केंद्रीय बैंक के लिए भविष्य का सटीक अनुमान लगाना मुश्किल होता है। ऐसे में ब्याज दरों में देरी से वृद्धि करने पर आरबीआई की आलोचन करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि मौद्रिक नीति का असर देर से होता है। ऐसे में रेपो दर में हालिया वृद्धि से महंगाई तुरंत कम नहीं होगी। हालांकि, मौद्रिक हालात को मजबूत करने के लिए एमपीसी की गैर-निर्धारित बैठक जैसे जल्दबाजी में उठाए गए कदम से कई सवाल खड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि दरों में बढ़ोतरी से आर्थिक वृद्धि की रफ्तार पर कुछ समय के लिए थोड़ा असर पड़ेगा।
एसएंडपी ने विकास दर में की 0.5 फीसदी कटौती
वैश्विक रेटिंग एजेंसी एस,एंडपी ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत के विकास दर अनुमान को 0.5 फीसदी घटाकर 7.3 फीसदी कर दिया है। पहले इसके 7.8 फीसदी रहने का अनुमान जताया था। एजेंसी ने कहा कि बढ़ती महंगाई और रूस-यक्रेन युद्ध लंबा खिंचने के कारण विकास दर में कटौती की गई है। महंगाई का लंबे समय ऊंचे स्तर पर बना रहना चिंता का विषय है। ऐसे में केंद्रीय बैंकों को नीतिगत दरों में वृद्धि करना पड़ती है। इससे उत्पादन और रोजगार पर बुरा असर पड़ता है। 2023-24 में विकास दर 6.5 फीसदी रह सकती है।
वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए भारत बेहतर स्थिति में : सीईए
मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी अनंत नागेश्वरन ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से पूरी दुनिया में अनिश्चितता का माहौल है। इसके बावजूद बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच भारत इस समय बेहतर स्थिति में है। अमेजन संभव समिट में उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों और अनिश्चितताओं का सामना करने के लिए भारत बेहतर स्थिति में है। इसकी प्रमुख वजह बेहतर वित्तीय प्रणाली और कॉरपोरेट जगत की मजबूत स्थिति है। इन दोनों वजहों से भारतीय अर्थव्यवस्था अच्छे मुकाम पर है।