समिति के एजेंडे में नोटबंदी, आरबीआई में सुधार, बैंकों में दबाव वाली परिसंपत्तियां और अर्थव्यवस्था की स्थिति सूचीबद्ध थी। पटेल ने समिति को नोटबंदी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में फंसे कर्ज (एनपीए) की स्थिति समेत कई मामलों के बारे में जानकारी दी।
टकराव का मतलब स्वायत्तता को चुनौती नहीं : दमोदरन
पूंजी बाजार नियामक सेबी के पूर्व अध्यक्ष एन. दामोदरन का कहना है कि आरबीआई और केंद्र के बीच टकराव का मतलब केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता को चुनौती नहीं है। पहले भी कई बार ऐसा हो चुका है, लेकिन इससे संस्थान को कोई नुकसान नहीं होता है। यह कहना गलत है कि आरबीआई की स्वायत्तता को खत्म किया जा रहा है। पहले टकराव बाहर नहीं आ पाते थे। अब लोगों को इसके बारे में पता चल रहा है और हर वर्ग का व्यक्ति इसमें कूद पड़ रहा है। बेहतर होगा कि दोनों पक्ष बैठकर इस मसले का समाधान निकाल लें।
वित्त पर संसद की स्थायी समिति 3 से 5 दिसंबर तक आईएल एंड एफएस के नए बोर्ड से अब तक की प्रगति का लेखाजोखा लेगी। सरकार ने 1 अक्तूबर को संकटग्रस्त समूह के निदेशक बोर्ड का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया था। समूह पर 8 अक्तूबर तक 94,215.6 करोड़ रुपये का कर्ज हो गया था। समूह को डूबने से बचाने की कवायद के तहत सरकार ने उदय कोटक की कार्यकारी अध्यक्षता में नए बोर्ड का गठन किया था।