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संसद की स्थायी समिति के समक्ष पेश हुए आरबीआई गवर्नर, सांसदों के सवालों का देंगे लिखित जवाब

Tue, 27 Nov 2018 11:42 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल (फाइल फोटो)
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भारतीय रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय के बीच कुछ मुद्दों को लेकर गहरे मतभेदों के बीच वित्त पर संसद की स्थायी समिति के समक्ष पेश हुए गवर्नर उर्जित पटेल ने मंगलवार को कहा कि वह कुछ विवादित मुद्दों पर लिखित जवाब देंगे। इनमें सरकार की ओर से रिजर्व बैंक की धारा-7 का प्रयोग करने का भी मुद्दा है। यह धारा सरकार को रिजर्व बैंक को निर्देश देने का अधिकार देती है। उन्हें 10-15 दिन में लिखित जवाब देने को कहा गया है। 

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सूत्रों के मुताबिक, पटेल ने समिति से कहा कि अर्थव्यवस्था की बुनियाद सुदृढ़ है। तेल के दाम चार साल के उच्चस्तर से नीचे आने पर और मजबूती मिलेगी। कर्ज में वृद्धि 15 प्रतिशत है। नवंबर, 2016 में नोटबंदी का अर्थव्यवस्था पर अस्थायी प्रभाव पड़ा। इससे पहले, पटेल को 12 नवंबर को समिति के सामने पेश होना था। इस दौरान उन्होंने धारा-7 के उपयोग, फंसे कर्ज, केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता और अन्य जटिल मुद्दों पर कुछ नहीं कहा। 

समिति के कई सदस्यों ने पटेल से अर्थव्यवस्था की स्थिति के साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सवाल पूछे। अर्थव्यवस्था को लेकर पटेल के विचार सकारात्मक थे। बैंकों के लिये पूंजी पर्याप्तता नियम के क्रियान्वयन पर पटेल ने कहा कि भारत जी-20 देशों को लेकर प्रतिबद्ध है और वैश्विक नियमों से बंधा है। केंद्रीय बैंक और वित्त मंत्रालय के बीच उलझे मुद्दों में आरबीआई के पास मौजूद आरक्षित कोष का आकार और लघु व मझोले उद्यमों के लिये कर्ज के नियमों में ढील शामिल हैं। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह 31 सदस्यीय समिति में सदस्य हैं, जबकि पूर्व केंद्रीय मंत्री एम. वीरप्पा मोइली अध्यक्ष हैं।

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गवर्नर ने दी एनपीए की जानकारी

समिति के एजेंडे में नोटबंदी, आरबीआई में सुधार, बैंकों में दबाव वाली परिसंपत्तियां और अर्थव्यवस्था की स्थिति सूचीबद्ध थी। पटेल ने समिति को नोटबंदी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में फंसे कर्ज (एनपीए) की स्थिति समेत कई मामलों के बारे में जानकारी दी। 

टकराव का मतलब स्वायत्तता को चुनौती नहीं : दमोदरन

पूंजी बाजार नियामक सेबी के पूर्व अध्यक्ष एन. दामोदरन का कहना है कि आरबीआई और केंद्र के बीच टकराव का मतलब केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता को चुनौती नहीं है। पहले भी कई बार ऐसा हो चुका है, लेकिन इससे संस्थान को कोई नुकसान नहीं होता है। यह कहना गलत है कि आरबीआई की स्वायत्तता को खत्म किया जा रहा है। पहले टकराव बाहर नहीं आ पाते थे। अब लोगों को इसके बारे में पता चल रहा है और हर वर्ग का व्यक्ति इसमें कूद पड़ रहा है। बेहतर होगा कि दोनों पक्ष बैठकर इस मसले का समाधान निकाल लें। 
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समिति आईएल एंड एफएस बोर्ड से लेगी प्रगति का लेखाजोखा

वित्त पर संसद की स्थायी समिति 3 से 5 दिसंबर तक आईएल एंड एफएस के नए बोर्ड से अब तक की प्रगति का लेखाजोखा लेगी। सरकार ने 1 अक्तूबर को संकटग्रस्त समूह के निदेशक बोर्ड का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया था। समूह पर 8 अक्तूबर तक 94,215.6 करोड़ रुपये का कर्ज हो गया था। समूह को डूबने से बचाने की कवायद के तहत सरकार ने उदय कोटक की कार्यकारी अध्यक्षता में नए बोर्ड का गठन किया था। 
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