भारत के गौरव का प्रतीक तीनों सेनाएं, थल सेना, वायु सेना और नौसेना के जवानों व अफसरों के राशन मनी भत्ते में केवल 70 पैसे की बढ़ोतरी की गई है। 2017-18 में राशन मनी भत्ता 116.59 रुपये था, जबकि 2018-19 के लिए यह भत्ता बढ़ाकर 117.29 रुपये प्रति जवान प्रतिदिन किया गया है। यूनाईटेड फ्रंट ऑफ एक्स-सर्विसमैन और नेशनल एक्स-सर्विस मैन को-ऑर्डिनेशन कमेटी ने इस राशन मनी भत्ते को भारतीय फौज के लिए अपमान करार दिया है। इन संगठनों के पदाधिकारियों का कहना है कि रोजाना बढ़ रही महंगाई के दौर में फौजियों के खाने में महज सत्तर पैसे का इजाफा किसी भी सूरत में जायज नहीं कहा जा सकता। इसमें जवानों को रोजाना दूध और अंडा भी नहीं मिल पाएगा। सरकार को कम से कम राशन मनी भत्ता 250 रुपये कर देना चाहिए।
राशन मनी भत्ते को लेकर रक्षा मंत्रालय की ओर से चार अप्रैल को तीनों सेनाओं के प्रमुखों के नाम एक पत्र भेजा गया था। इसमें तीनों सेनाओं के जवानों और अफसरों को बराबर का राशन मनी भत्ता देने का जिक्र है। सेनाओं के इंटर सर्विस ऑगनाइजेशन (आईएसओ) के कर्मियों को भी यही भत्ता मिलेगा। इस पत्र में चार वर्षों के राशन मनी भत्ते के बारे में बताया गया है।
| वित्तीय वर्ष |
राशन मनी भत्ता (रुपये) |
स्पेशल रेट (रुपये) |
| 2015-16 |
97.85 |
195.70 |
| 2016-17 |
113.67 |
227.34 |
| 2017-18 |
116.59 |
233.18 |
| 2018-19 |
117.29 |
234.58 |
नोट: राशन मनी भत्ता शांत क्षेत्र में तैनात जवानों और अफसरों को मिलता है, जबकि इस भत्ते का स्पेशल रेट केवल उस स्थिति में मिलेगा, जब कोई सैनिक रेल या रोड से यात्रा कर रहा हो। मूवमेंट कंट्रोल ड्यूटी के दौरान और किसी ऐसी जगह पर ड्यूटी देना, जहां सरकार द्वारा राशन की सप्लाई न की जाती हो।
राशन मनी भत्ता 250 रुपये हो या फिर खुद राशन सप्लाई करे सरकार: ले. कर्नल साधु सिंह
भारतीय सेना (फाइल फोटो)
यूनाईटेड फ्रंट ऑफ एक्स-सर्विसमैन के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट कर्नल साधु सिंह सोही (सेवानिवृत्त) का कहना है कि राशन मनी भत्ते में केवल सत्तर पैसे की बढ़ोतरी करना सेना का अपमान है। महंगाई कहां जा पहुंची है, क्या यह बात सरकार को मालूम नहीं है। जवान अपनी ड्यूटी करेगा या राशन मनी भत्ते को देखेगा। जवान कहां से राशन लाएंगे। मैस वाले लाएंगे तो भी जवानों को यह भत्ता क्लेम करने के लिए क्लर्क का काम भी करना होगा।
यह जवानों को परेशान करने वाली बात है। इतने से भत्ते में जवान को कैसा खाना मिलता होगा, इसका अंदाजा लगा सकते हैं। वह दूध या अंडा कहां से लेगा। चावल को ही देख लें, वह बीस-पच्चीस रुपये किलोग्राम के रेट में भी मिलता है और पचास या सत्तर रुपये वाला भी है। इस राशन मनी में जवान या अधिकारी कौन सा चावल खाता होगा, सरकार को यह सोचना चाहिए।
रेट भी सब जगह एक जैसे नहीं होते। मैदानी भाग में कुछ और रेट है तो बॉर्डर पर कुछ और। पहाड़ या जंगल में अलग रेट मिलेगा। नेशनल एक्स-सर्विस मैन को-ऑर्डिनेशन कमेटी के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट वीएन मिश्रा बताते हैं, सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि वह अपनी फौज को उत्तम क्वालिटी वाला खाना कैसे देगी।
अगर सरकार राशन मनी भत्ते की जगह राशन देती है तो कोई हर्ज नहीं है, लेकिन यहां पर देखने वाली बात यह होगी कि उस राशन की गुणवत्ता कैसी है। यदि सरकार राशन नहीं देना चाहती तो कम से कम एक दिन का राशन मनी भत्ता 250 रुपये किया जाए। अगर इससे कम की राशन मनी है तो समझो सरकार अपने जवानों की सेहत का ख्याल नहीं रख रही है।