राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को कहा कि अंगदान, देश की जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा देशभक्ति का ही एक रूप है। उन्होंने कहा कि मानव शरीर उपयोग दूसरों के लिए जीना और मरना है। संघ प्रमुख अंगदान के क्षेत्र में काम करने वाले गैर सरकारी संगठन डोनेट लाइफ के एक कार्यक्रम में बोल रहे थे।
इस दौरान उन्होंने कहा कि देश में कई लोग इसलिए पीड़ित हैं क्योंकि पैसा खर्च करने के बावजूद उन्हें वर्षों तक स्वस्थ अंग नहीं मिल पाते हैं। एक आजाद देश में, देशभक्ति का एक पहलू सार्वजनिक जीवन के नियमों का पालन करना है, कानून का उल्लंघन नहीं करना या उसे अपने हाथ में नहीं लेना और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी शिकायतें व्यक्त करना भी है लेकिन दूसरा पहलू देश के हर व्यक्ति का दर्द साझा करना है क्योंकि वे सभी हमारे अपने हैं। उन्होंने कहा कि इसलिए अंगदान देशभक्ति का काम है, देशभक्ति का एक रूप है।