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हिंदू देवताओं के अलावा जन्मस्थान कैसे न्यायिक व्यक्ति हो सकता है : कोर्ट

Thu, 08 Aug 2019 05:33 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
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अयोध्या विवाद पर सुनवाई के तीसरे दिन गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि भगवान का जन्मस्थान किसी मामले में पार्टी के तौर पर न्यायिक व्यक्ति कैसे बन सकता है। हिंदू धर्म में भगवान को तो ऐसा न्यायिक व्यक्ति माना जाता है, जिसके नाम से संपत्ति हो सकती है और वह मुकदमा शुरू कर सकता है। हिंदू पक्षकार रामलला विराजमान की ओर से कहा गया कि हिंदू धर्म में किसी जगह की पूजा के लिए वहां मूर्ति होना जरूरी नहीं।

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हिंदू तो नदियों और सूर्य की भी पूजा करते हैं। ऐसे में जन्मस्थान को भी न्यायिक व्यक्ति मान सकते हैं। उन्होंने कहा कि जन्मस्थान बहुत महत्वपूर्ण है। राम जन्मभूमि पर सबकी आस्था और विश्वास है। संविधान पीठ ने रामलला विराजमान से पूजा के स्राेत और राम जन्मस्थान के बारे में भी सवाल किए। उल्लेखनीय है कि 2.77 एकड़ की विवादित भूमि पर दावा करते हुए इस मामले में भगवान राम के जन्मस्थान को भी एक पक्षकार बनाया गया है।

शुक्रवार को भी इसकी सुनवाई जारी रहेगी। इससे पहले, भाजपा नेता सुब्रहमण्यम स्वामी ने रामलला की पूजा संबंधी अपने मौलिक अधिकार से जुड़ा मुद्दा कोर्ट के सामने उठाना चाहा। लेकिन चीफ जस्टिस ने उन्हें रोकते हुए कहा कि आपको उचित समय पर सुनेंगे। 
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चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में पांच जजों की संविधान पीठ ने सुबह साढ़े 10 बजे सुनवाई शुरू की। रामलला विराजमान की ओर से सीनियर एडवोकेट के परासरन ने दलीलें रखीं।

पढ़िए कार्यवाही:
परासरन: संस्कृत में कहते हैं- 'जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादिप गरियसि। जन्मस्थान महत्वपूर्ण है। भगवान राम के जन्मस्थान की कोई सही जगह चिह्नित नहीं है। हिंदू-मुस्लिम दोनों विवादित जमीन को जन्मस्थान मानते और कहते आए हैं। यह हिंदुओं की आस्था का अभिन्न अंग है। इसे अलग नहीं कर सकते हैं। 
जस्टिस अशोक भूषण: जिस तरह गंगा नदी न्यायिक व्यक्ति मानी गई है, क्या जन्मभूमि न्यायिक व्यक्ति (ज्यूरिस्टिक पर्सन) हो सकती है? हम समझते हैं कि मूर्ति न्यायिक व्यक्ति हो सकती है, लेकिन जन्मभूमि को लेकर कानून क्या है? 
परासरन: राम जन्मभूमि और रामलला दोनों ही न्यायिक व्यक्ति हो सकते हैं। क्योंकि वो मूर्ति नहीं, बल्कि देवता हैं। हम उन्हें सजीव मानते हैं। हिंदू धर्म में किसी जगह को पवित्र मानकर पूजा के लिए मूर्ति जरूरी नहीं है। हम नदियों और सूर्य को भी पूजते हैं। हम कह सकते हैं कि सूर्य एक न्यायिक व्यक्ति है। 
जस्टिस भूषण: वादी नं. 1 रामलला हैं, जोकि भगवान हैं। वादी नं. 2 जन्मभूमि है। अगर कोर्ट भगवान को न्यायिक व्यक्ति मानता है तो पूरी जमीन कैसे एक न्यायिक व्यक्ति की हो सकती है? 
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़: रामलला विराजमान की दलील है कि जन्मभूमि न्यायिक व्यक्ति है, क्योंकि वह लोगों की पूजा-पाठ की वस्तु है। परंतु इस पूजा-पाठ का स्रोत क्या है? 
परासरन: हिंदू मंदिरों में आमतौर पर मूर्ति पूजा होती है। कुछ मंदिरों में भगवान शिव मूर्ति रूप में नहीं, बल्कि लिंग के रूप में हैं। पूजा-पाठ आस्था पर निर्भर करती है। 
चीफ जस्टिस: सीनियर एडवोकेट यह सवाल नोट कर लें, ताकि वह अपनी दलीलें पूरी करने के बाद जवाब दे सकें। 
परासरन: कोर्ट ने राम जन्मभूमि को मुद्दई मानने से इनकार कर दिया था। इसलिए रामलला विराजमान को पक्षकार बनना पड़ा। रामलला नाबालिग हैं, इसलिए हम उनका केस लड़ रहे हैं। किसी को पूजा के अधिकार से वंचित करना गलत है। 
जस्टिस बोबडे: अगर किसी को रोज पूजा से रोका जाए तो क्या ये उसके साथ निरंतर गलत करना होगा? 
परासरन: हां। जब से सरकार ने जमीन कब्जे में ली है। यह निरंतर गलत तभी से शुरू हुआ। 
3.30 बजे कोर्ट ने सुनवाई शुक्रवार सुबह तक के लिए टाल दी। रामलला विराजमान की दलीलें शुक्रवार को जारी रहेंगी। रामलला विराजमान ने कहा- पूजा के अधिकार से वंचित करना गलत है...

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