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Rajya Sabha Election: हरियाणा-राजस्थान समेत चार राज्यों की 16 सीटों पर मतदान होना तय, जानें कहां क्या हैं समीकरण

Fri, 03 Jun 2022 01:05 PM IST
जयदेव सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हरियाणा में दो राज्यसभा सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में हैं। राजस्थान में चार सीटों के लिए पांच, कर्नाटक में चार सीटों के लिए छह उम्मीदवार मैदान में हैं। महाराष्ट्र की छह राज्यसभा सीटों के लिए सात उम्मीदवार मैदान में हैं। 
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15 राज्यों की 57 राज्यसभा सीटों के लिए चल रही है चुनाव प्रक्रिया। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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15 राज्यों में राज्यसभा चुनाव में नामांकन की प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है। 11 राज्यों की 41 सीटों पर उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन तय है। वहीं, चार राज्यों की 16 सीटों के लिए 10 जून को मतदान होगा। इसी दिन इन सीटों पर नतीजे आएंगे। जिन राज्यों में मतदान की नौबत आई है उनमें महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा और कर्नाटक शामिल हैं। 
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आइये जानते हैं कि आखिर इन राज्यों में राज्यसभा चुनाव का समीकरण क्या है? कहां किसका पलड़ा भारी है? भाजपा ने चार अतिरिक्त सीटें जीतने के लिए क्या रणनीति बनाई है? कांग्रेस का क्या प्लान है? 

राजस्थान में चार सीटों के लिए चुनाव। - फोटो : अमर उजाला
राजस्थान में क्या हैं समीकरण?
राजस्थान में चार राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव हो रहा है। कांग्रेस ने तीन और भाजपा ने एक उम्मीदवार उतारा है। 
घनश्याम तिवाड़ी भाजपा के उम्मीदवार हैं। प्रमोद तिवारी, मुकुल वासनिक और रणदीप सुरजेवाला को कांग्रेस ने उम्मीदवार बनाया है। 
इनके अलावा हरियाणा से निर्दलीय सांसद सुभाष चंद्रा इस बार भाजपा के समर्थन से राजस्थान में किस्मत आजमाएंगे। चंद्रा का कार्यकाल दो अगस्त को पूरा हो रहा है। 

क्या होगा गणित?
चार सीटों के लिए पांच उम्मीदवार उतरने से चुनाव यहां चुनाव होंगे। 200 सीटों वाली राजस्थान विधानसभा में एक उम्मीदवार को जीतने के लिए 41 वोट की जरूरत होगी। मौजूदा सदन में कांग्रेस के 108, भाजपा के 71 विधायक हैं। संख्या बल के लिहाज से कांग्रेस के दो और भाजपा का एक उम्मीदवार आसानी से जीत जाएगा। चौथी सीट के लिए दोनों पार्टियों को दूसरे दलों के विधायकों की जरूरत पड़ेगी। कांग्रेस को अपने 108 विधायकों के अलावा रालोद के एक और माकपा के दो विधायकों का वोट मिलना तय माना जा रहा है। ऐसे में उसे अपने तीसरे प्रत्याशी को जिताने के लिए 14 अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ेगी। वहीं, भाजपा के समर्थन से निर्दलीय पर्चा भरने वाले सुभाष चंद्रा को जीत के लिए आठ अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ेगी। उन्हें भाजपा 30 विधायकों के अलावा हनुमान बेनीवाल के तीन विधायकों का समर्थन मिलना तय माना जा रहा है। ऐसे में निर्दलीय और बीटीपी के विधायकों का वोट किसी भी उम्मीदवार के लिए निर्णायक होगा। समर्थन जुटाने के लिए राजस्थान में रिसॉर्ट पॉलिटिक्स भी शुरू हो चुकी है। 
 

हरियाणा में दो सीटों पर होना है चुनाव। - फोटो : अमर उजाला
हरियाणा का क्या हाल है?
हरियाणा में दो राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव हो रहा है। दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में हैं। भाजपा से कृष्णलाल पंवार, कांग्रेस से अजय माकन और भाजपा के समर्थन से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर उतरे कार्तिकेय शर्मा। कार्तिकेय के पिता विनोद शर्मा पहले कांग्रेस में थे। उनकी कांग्रेस के कई नेताओं से अच्छी दोस्ती है। ऐसे में कांग्रेस को अपने विधायकों के टूटने का डर सता रहा है, जो बाहरी उम्मीदवार उतारे जाने से नाराज बताए जा रहे हैं। 
संख्या बल की बात करें तो 90 सदस्यों वाली विधानसभा में एक उम्मीदवार को जीतने के लिए 31 वोट की जरूरत पड़ेगी। भाजपा के पास चालीस विधायक हैं। ऐसे में भाजपा अपने अधिकृत उम्मीदवार को आसानी से जिता लेगी। वहीं, कांग्रेस के पास 31 विधायक हैं। सभी विधायकों ने अजय माकन को वोट दिया तो माकन भी जीत जाएंगे। 
निर्दलीय कार्तिकेय शर्मा को भाजपा के नौ, जजपा के 10, हलोप, इनेलो के एक-एक और सात निर्दलियों का वोट मिलता है तो ये आंकड़ा 28 तक पहुंचेगा। ऐसे में कांग्रेस के दो विधायकों के क्रॉस वोटिंग करने से माकन का खेल बिगड़ सकता है। हालांकि, निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू और इनेलो विधायक अभय चौटाला ने अभी तक किसी भी प्रत्याशी को समर्थन देने का एलान नहीं किया है। 
 
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महाराष्ट्र में छह सीटों पर होने हैं राज्यसभा चुनाव। - फोटो : अमर उजाला
महाराष्ट्र में कैसी महाभारत
महाराष्ट्र में छह राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव हो रहा है।  288 सीटों वाली विधानसभा में एक उम्मदीवार को जीतने के लिए 42 वोट की जरूरत होगी। मौजूदा विधानसभा में भाजपा के 106, शिवसेना के 56, एनसीपी के 53 और कांग्रेस के 44 विधायक हैं। ऐसे में कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना एक-एक और भाजपा दो उम्मीदवारों को आसानी से जिता सकते हैं। पेंच शिवसेना के दूसरे और भाजपा के तीसरे उम्मीदवार की वजह से फंसा है। 
तीसरे उम्मीदवार के लिए भाजपा के पास 22 वोट हैं। वहीं, शिवसेना के दूसरे उम्मीदवार के लिए 14 वोट हैं। भाजपा के पास छह निर्दलियों समेत 113 विधायकों का समर्थन है। इस तरह तीसरे उम्मीदवार के लिए उसके पास कुल वोटों की संख्या 29 हो जाती है। वहीं, सत्ताधारी महा विकास अघाड़ी 169 विधायकों के समर्थन का दावा करती है। इसमें शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के मिलाकर 153 विधायक हैं। आठ निर्दलीय और आठ अन्य छोटी पार्टियों के विधायक शामिल हैं। निर्दलीय और छोटी पार्टियों को छोड़कर शिवसेना उम्मीदवार के लिए 27 अतिरिक्त वोट रहेंगे। 
अगर निर्दलीय और छोटे दलों ने चुनाव के दौरान महा विकास अघाड़ी के पक्ष में वोट दिया तो ये संख्या 43 पहुंच जाएगी। ऐसे में शिवसेना उम्मीदवार आसानी से जीत जाएगा। हालांकि, अगर भाजपा कुछ निर्दलीय और छोटे दलों के विधायकों को तोड़ने में सफल रही थो मुकाबला रोचक हो सकता है। चुनाव से पहले भाजपा और शिवसेना दोनों अपने सभी उम्मीदवारों के जीतने का दावा कर रही हैं। 
कर्नाटक में क्या होगा नया नाटक
राज्यसभा चुनाव में सबसे रोचक मुकाबला कर्नाटक में ही है। यहां चार राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होना है। इन चार सीटों के लिए छह उम्मीदवार मैदान में हैं। भाजपा ने तीन, कांग्रेस ने दो और जेडीएस ने एक उम्मीदवार उतारा है।  225 सदस्यीय विधानसभा में एक उम्मीदवार को जीतने के लिए 46 वोट की जरूरत होगी। मौजूदा सदन में स्पीकर समेत भाजपा के 120, कांग्रेस के 69, जेडीएस के 32 विधायक हैं। अन्य छोटे दलों के चार विधायक हैं। संख्याबल के मुताबिक भाजपा के दो और कांग्रेस के एक उम्मीदवार को आसानी से जीत मिल सकती है। चौथी सीट के लिए तीन पार्टियों में मुकाबला होगा। अपने तीसरे उम्मीदवार के लिए भाजपा के पास 28 अतिरिक्त वोट हैं। वहीं, दूसरे उम्मीदवार के लिए कांग्रेस के पास 23 अतिरिक्त वोट होंगे। जबकि जेडीएस उम्मीदवार को 32 वोट मिल सकते हैं। अगर जेडीएस का किसी भी दल से चुनाव के दिन तक समझौता नहीं होता और बड़े पैमाने पर क्रॉस वोटिंग नहीं होती, तो चौथे उम्मीदवार की जीत हार दूसरी वरीयता के वोट से होगा। 
 भाजपा की क्या रणनीति?
भाजपा ने चारों राज्यों में चार अतिरिक्त सीटें जीतने के लिए कमर कस ली है। पार्टी ने चारों राज्यों में चार केंद्रीय मंत्रियों को प्रभारी बनाया है। राजस्थान के लिए नरेंद्र सिंह तोमर, हरियाणा के लिए गजेन्द्र सिंह शेखावत, कर्नाटक के लिए जी किशन रेड्डी और महाराष्ट्र के लिए अश्विनी वैष्णव के प्रभारी बनाया गया है। भाजपा की कोशिश कांग्रेस की अंदरूनी कलह और निर्दलीय विधायकों की मदद से इन सीटों की जीतने की है। 
कांग्रेस क्या कर रही है?
हरियाणा और राजस्थान में कांग्रेस ने विधायकों की बाड़ेबंदी शुरू कर दी है। राजस्थान के विधायकों को उदयपुर भेजे जाने की खबरें हैं। वहीं, हरियाण के विधायकों को अलग रखने की तैयारी हो रही है। कर्नाटक में जेडीएस और कांग्रेस के बीच बातचीत जारी है। दोनों एक दूसरे के उम्मीदवार के समर्थन में अपने उम्मीदवार का नामांकन वापस लेने की अपील कर रहे हैं। यहां चौथी सीट के लिए भाजपा के लहर सिंह सिरोया, कांग्रेस के मंसूर अली खान और जेडीएस के कुपेन्द्र रेड्डी ने चौथी सीट के लिए नामांकन किया है। जेडीएस कांग्रेस से मंसूर अली खान का नामांकन वापस लेने की अपील कर रही है। इसके लिए पार्टी प्रमुख एचडी देवगौड़ा ने अपने दो नेताओं को पूर्व मुख्यमंत्री से मिलने भी भेजा था। वहीं, कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार जेडीएस से कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में वोट करने की अपील कर चुके हैं।
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