शीर्ष कांग्रेसी नेता राशिद अल्वी ने भाजपा की इस नीति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उसकी सांप्रदायिक सोच एक बार नहीं, बार-बार लोगों के सामने आ रही है। भाजपा यह संकेत दे रही है कि उसे मुस्लिम समाज के लोगों की कोई जरुरत नहीं है। जबकि सच्चाई यह है कि यह देश हिंदू-मुस्लिम दोनों धर्मों की एकता का साक्षी रहा है। और दोनों के साथ आने से इस देश की नींव मजबूत हुई है।
लेकिन भाजपा की चुनावी रणनीति पर बारीक निगाह रखने वाले लोगों की निगाह में इसमें कुछ भी अप्रत्याशित नहीं है। भाजपा जिस तरह खुलकर हिंदुत्व कार्ड खेल रही है उससे इस समय की राजनीति में उसे यही जान पड़ता है।
ध्यान रहे कि भाजपा ने लोकसभा चुनाव 2014 और उसके बाद उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भी किसी भी मुस्लिम को अपना चेहरा नहीं बनाया था। हालांकि जीत के बाद मोहसिन रजा को बाहर से लाकर अल्पसंख्यक मामलों का मंत्री बना दिया गया था।