उन्होंने कहा कि सरकार के पास विकल्प खुला है, यदि एक संवैधानिक संस्था निर्णय करने में हिचक रही है तो संसद को कानून बनाकर मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए। सरकार अदालत को बताए कि देश की परिस्थिति ऐसी है इसलिए मंदिर निर्माण पर जल्द निर्णय किया जाए।