केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को कहा कि भारत व्यवसायों के लिए गंतव्य है। देश में कारकों का सही संयोजन है जो मध्य वर्ग, क्रय शक्ति के साथ कैप्टिव बाजार, प्रौद्योगिकी संचालित सार्वजनिक निवेश और उत्पादों, डिजिटल बुनियादी ढांचे, कानून के शासन समेत बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए मायने रखता है।
रायसीना डायलॉग में उन्होंने कहा कि भारत में ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जो निजी क्षेत्र के लिए उपलब्ध नहीं है। साथ ही सरकारी संपत्तियों की बिक्री संबंधी विपक्ष की आलोचना को भी खारिज किया। कहा कि ऐसा कुछ नहीं है कि हम सबकुछ बेच रहे हैं। सरकार दूरसंचार समेत चार रणनीतिक सेक्टरों में अपनी मौजूदगी बनाए हुए है।
'सरकार सबकुछ बेचने के लिए उतावली नहीं'
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत में ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जो निजी क्षेत्र के कार्य करने के लिए उपलब्ध न हो। सार्वजनिक क्षेत्र की नीति कमजोर नहीं है और सरकार सबकुछ बेचने के लिए उतावली नहीं है लेकिन पिन से लेकर फसल उत्पादन का काम सरकार नहीं करेगी। इसलिए जहां सरकार को नहीं होना चाहिए, वहां नहीं होगी। लेकिन जहां रणनीतिक हितों की वजह से सरकार को होना है, वह वहां होगी। इसका एक उदाहरण दूरसंचार क्षेत्र है। एक दूरसंचार कंपनी होगी जो सरकार के स्वामित्व वाली होगी और इसे पेशेवर तरीके से चलाया जाएगा।
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'सबकुछ नहीं बेच रहे हम, अच्छी तरह से जानता है विपक्ष'
विपक्ष अच्छी तरह से मतलब समझता है लेकिन कह रहा है कि हम उन्हें बेच रहे हैं। हम सबकुछ नहीं बेच रहे हैं। रणनीतिक क्षेत्रों में सरकारी नियंत्रण के तहत होल्डिंग कंपनी स्तर पर मौजूदा सार्वजनिक क्षेत्र के वाणिज्यिक उद्यमों की न्यूनतम उपस्थिति को बनाए रखा जाएगा। शेष उद्यमों को निजीकरण या किसी अन्य पीएसई के साथ विलय या बंद करने पर विचार किया जाएगा।
व्यावसायिक रूप से संचालित होंगी ये सरकारी कंपनियां
उन्होंने कहा कि देश में चार व्यापक रणनीतिक क्षेत्रों में सरकार के स्वामित्व वाली व्यावसायिक रूप से संचालित कंपनियां होंगी। पीएसई नीति के मुताबिक, चार व्यापक रणनीतिक क्षेत्र हैं, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष और रक्षा, परिवहन और दूरसंचार, बिजली, पेट्रोलियम, कोयला और अन्य खनिज तथा बैंकिंग, बीमा और वित्तीय सेवाएं।
जी-20 में वैश्विक दक्षिण की आवाज उठा रहा भारत
उन्होंने कहा कि भारत जी-20 में वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) की आवाज उठा रहा है। उन्होंने कहा कि अच्छी तरह से प्रशिक्षित युवा, कैप्टिव बाजार देने वाला मध्य वर्ग, प्रौद्योगिकी संचालित निवेश और सार्वजनिक बुनियादी ढांचा भारत के निरंतर विकास के कारणों में से हैं। जलवायु वित्त का जिक्र करते हुए कहा कि अनुकूलन और शमन दोनों पर चर्चा करने की आवश्यकता है। वैश्विक दक्षिण और उसकी जरूरतों पर चर्चा करने की व्यापक तैयारी है।
आत्मनिर्भर भारत संरक्षणवादी कदम नहीं, व्यवसायों का गंतव्य भारत
सरकार के आत्मनिर्भर भारत पर जोर देने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह संरक्षणवादी कदम नहीं है। जी-20 में हिस्सा लेने वाले कई मंत्री मित्रता की बातें करते रहे हैं। आज भारत व्यवसायों के लिए गंतव्य है। उन्होंने कहा कि देश में कारकों का सही संयोजन है जो मध्य वर्ग, क्रय शक्ति के साथ कैप्टिव बाजार, प्रौद्योगिकी संचालित सार्वजनिक निवेश और उत्पादों, डिजिटल बुनियादी ढांचे, कानून के शासन समेत बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए मायने रखता है।