रेल मंत्रालय का प्रभार संभालने के बाद नए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी इस प्रोजेक्ट की समीक्षा की है और इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। बताया गया है कि इंजीनियरिंग कंपनी मेधा जिसे इन सभी 44 वंदे भारत ट्रेनों के लिए बिजली की आपूर्ति का ठेका फरवरी में दिया गया था, उसे रेलवे अधिकारियों ने उन्हें अपनी उत्पादन को और बढ़ाने के लिए कहा है। जिससे अगले साल मार्च तक सभी ट्रायल रन पूरे करने के बाद कम से कम दो ट्रेनों को चलाया जा सके और बाकी के ट्रायल भी हो सके।
मिली जानकारी के मुताबिक वंदे भारत ट्रेनसेट को पास करने के लिए सभी जरूरी परीक्षणों के अलावा, ट्रेन को यात्रियों के साथ 1 लाख किमी का वाणिज्यिक संचालन भी पूरा करना होगा। इस शर्त के कारण स्वदेशी सेमी-हाई स्पीड ट्रेनों को रेलवे पटरियों पर व्यावसायिक रूप से उतारने में महीनों लग सकते हैं।
आजादी की 75वीं वर्षगांठ को खास बनाना चाहता है रेलवे
शुरूआती योजना यह थी कि दिसंबर 2022 या 2023 की शुरुआत में वंदे भारत ट्रेनों के पहले सेट को रेल पटरियों पर उतारा जाए। लेकिन 15 अगस्त 2022 को राष्ट्र आजादी का 75वीं वर्षगांठ मनाएगा, इसे ही खास बनाने के लिए रेलवे की योजना 44 वंदे भारत ट्रेनों को पटरी पर उतारने की है। सूत्रों के मुताबिक इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए रेलवे बोर्ड की हाल में ही एक बैठक हुई है। बैठक में संबंधित रेलवे बोर्ड के सदस्यों, उत्पादन इकाइयों के महाप्रबंधकों, अन्य इंजीनियरों ने भाग लिया।
क्या है वंदे भारत ट्रेन
वंदे भारत देश की पहली स्वदेशी सेमी हाई स्पीड ट्रेन है। इस ट्रेन को 2018 मे बनाया गया था और इसे बनाने की घोषणा 2017 में की गई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली वंदे भारत एक्सप्रेस को 15 फरवरी 2019 को हरी झंडी दिखाई थी। पहली ट्रेन दिल्ली से वाराणसी के बीच चलाई गई। दिल्ली-वाराणसी के बाद दूसरी ट्रेन दिल्ली-कटरा के बीच चल रही हैं। इसलिए रेल मंत्रालय की योजना ऐसे 100 से अधिक ट्रेन चलाने की है।
ट्रेन में 16 कोच, एक कोच पर 110 करोड़ रुपये का खर्च
वंदे भारत ट्रेन सेट में 16 कोच होते हैं 16 डिब्बों वाली 100 वंदे भारत ट्रेनों के निर्माण पर लगभग 11,000 करोड़ रुपये (प्रति ट्रेन लगभग 110 करोड़ रुपये) खर्च होंगे। नई योजना के तहत, रेल मंत्रालय का विचार है कि भारतीय रेलवे की तीनों उत्पादन इकाइयां रायबरेली की मॉडर्न कोच फैक्ट्री, चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री और कपूरथला की रेल कोच फैक्ट्री से वर्ष 2024 तक ज्यादा से ज्यादा वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों का निर्माण हो सके।