भारतीय रेलवे के लिए अब अपने ही परेशानी का कारण बनने जा रहे हैं। रेलवे कर्मचारी यूनियन ने रेलवे की खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संगठनों की मांग है कि मंत्रालय रेल कर्मियों को फ्रंटलाइन वर्कर का दर्ज दे और कोविड 19 से जिन कर्मचारियों की मौत हुई है उन्हें 50 लाख तक मुआवजा दिया जाए। नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमैन के महामंत्री डॉ एम राघवैया का कहना है कि कोविड 19 महामारी की दोनों लहर के दौरान रेल कर्मचारियों ने अपनी सेवाएं प्रदान की उसे देखते हुए रेल कर्मियों को फ्रंटलाइन वर्कर का दर्जा दिया जाना चाहिए और इस वैश्विक महामारी से जिन रेल कर्मियों की जान गई है, उनके परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाना चाहिए।
नहीं होने देंगे रेलवे का निजीकरण
राघवैया ने आगे कहा, सरकार जिस दिन रेलवे के निजीकरण का आदेश करेगी, उसी दिन बिना किसी नोटिस के रेल का चक्का जाम कर दिया जाएगा। हम रेलवे का निजीकरण किसी हाल में नहीं होने देंगे। कोविड-19 महामारी जैसी विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भारतीय रेलवे ने वर्ष 2020-21 में पूर्व के सारे रिकार्ड तोड़ते हुए मालभाड़ा परिवहन में 1233 मिलयन टन सामग्री का परिवहन कर उल्लेखनीय उपलब्धि प्राप्त की है।
इसके बावजूद रेल कर्मचारी भी कई समस्याओं का निराकरण नहीं होना बेहद दुखद है। कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीय रेलवे ने न केवल माल गाड़ियों का संचालन किया बल्कि अन्य आवश्यक सामग्रियों की आपूर्ति के लिए विशेष पार्सल ट्रेनें भी चलाई। राष्ट्रहित में ट्रेनों के संचालन एवं अन्य कार्यों में लगे कर्मचारियों में से एक लाख से अधिक कर्मचारी कोविड़-19 संक्रमित हो चुके हैं तथा दुर्भाग्य से 2800 से अधिक रेल कर्मचारियों की कोरोनावायरस के कारण जान जा चुकी है।