इससे पहले बुधवार को हुई प्रेस वार्ता में भी कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष ने आंकड़ों के साथ ही बातचीत की थी। उन्होंने कहा था, जब डीजल और पेट्रोल के दाम बढ़ते हैं, एक तो डायरेक्ट चोट लगती है और एक इनडायरेक्ट चोट लगती है। जो व्यक्ति गाडी में, स्कूटर में, ट्रक में डीजल-पेट्रोल डालता है, उसकी जेब पर डायरेक्ट चोट लगती है। जब डीजल व पेट्रोल का दाम बढ़ता है, तो ट्रांसपोर्ट कॉस्ट बढ़ती है। जब ट्रांसपोर्ट कॉस्ट बढ़ती है, तो सब चीजों के दाम बढ़ते हैं, उससे लोगों को इनडायरेक्ट चोट लगती है।
2014 में नरेंद्र मोदी ने कहा था कि डीजल, पेट्रोल के दाम बढ़ते जा रहे हैं। उस वर्ष 410 रुपए प्रति सिलेंडर की कीमत थी। जब हमने, यानी यूपीए ने ऑफिस छोड़ा तब से लेकर आज सिलेंडर का रेट 885 रुपए हो गया है। इसके दाम में 116 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। साल 2014 में पेट्रोल के दाम 71.51 रुपये थे, आज 101.34 रुपये हो गए हैं। सीधे तौर पर इसमें 42 फीसदी का इजाफा हुआ। 57.28 रुपए प्रति लीटर डीजल, आज 88.77 रुपए प्रति लीटर हो गया है। इसमें भी 55 फीसदी की बढ़ोतरी हो गई है।
जब राहुल गांधी से यह सवाल किया गया कि आप संसद में मुद्दा उठाते हैं, यहां भी प्रेस वार्ता कर रहे हैं, क्या आपको लगता है कि जनता जो प्रभावित है, वह आपके साथ है, उन्होंने कहा, देखिए, गुस्सा पनप रहा है, वो तो साफ है। मगर दूसरी तरफ उस आवाज को व्यवस्थित तरीके से दबाया जा रहा है। अभी कोरोना महामारी का समय है। हम भी नहीं चाहते कि लाखों लोग सड़क पर निकलें। हम जानते हैं कि उसके दूसरे नतीजे हो सकते हैं। बतौर राहुल, थोड़ा रिस्ट्रेन शो कर रहे हैं, मगर जनता में जबरदस्त गुस्सा है।
उन्होंने कहा कि संस्थानों पर सरकार का भारी दबाव है। संसद में हमें बात करने नहीं देते हैं। उन्होंने विश्वास के साथ कहा कि ये गुस्सा बढ़ता जाएगा और फिर जबरदस्त प्रतिक्रिया आएगी। जब यूपीए की सरकार थी तो 105 डॉलर कच्चे तेल का दाम था। आज वह 71 डॉल पर है। राहुल गांधी ने कहा कि गैस के अंतरराष्ट्रीय दाम देखिए, हमारे समय में 880 डॉलर प्रति मीट्रिक टन था, आज 653 डॉलर है, यानि 26 फीसदी कम हो गया है। इन सबके बावजूद लोगों को कितने रुपये देने पड़ रहे हैं, उससे आप वाकिफ हैं।