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Rahul Gandhi: कितना बदल गए हैं राहुल,अब बहुत कम बोलते हैं; कांग्रेस मुख्यालय में चार लाइन में रखी अपनी बात

सार

कांग्रेस के प्रवक्ता रोहन गुप्ता कहते हैं कि बड़े लंबे समय से भाजपा के हाथ खाली हैं। कांग्रेस को पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरग़े चला रहे हैं। इससे जहां भाजपा के परिवारवाद के आरोप को बड़ा झटका लगा है, वहीं राहुल गांधी के संयमित, संक्षिप्त वक्तव्य से भी भाजपा के नेताओं को प्रधानमंत्री मोदी बनाम राहुल गांधी का प्रोपैगैंडा फैलाने का अवसर नहीं मिल पा रहा है।
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राहुल गांधी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उच्चतम न्यायालय ने राहुल गांधी की सजा पर रोक लगाई है। कांग्रेस पार्टी इसका जश्न मना रही है, लेकिन पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने खुद को बड़ा संतुलित रखा। बहुत कम शब्दों में अपनी बात कही। पिछले कई ऐसे अवसर आए, जहां राहुल गांधी ने अपने पुराने चिर परिचित अंदाज जैसा रुख नहीं अपनाया। राहुल गांधी के टीम की सदस्य रही तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव कहती हैं कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष की समझदारी ने भाजपा की परेशानी को बढ़ा दिया है।

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अगस्त 2021 में सुष्मिता देव ने कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया था। 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार के बाद कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी पद से इस्तीफा दे दिया था। सुष्मिता देव बताती हैं कि उसके बाद राहुल को अगले दो साल से अधिक समय तक काफी मनाने की कोशिश हुई लेकिन न तो उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष का पद स्वीकार किया और न ही इस पर प्रियंका गांधी या सोनिया गांधी को आने दिया। राहुल गांधी की सोच के आधार पर आगे बढ़ी कांग्रेस का यह बहुत बड़ा फैसला था। अमर उजाला से बातचीत में सुष्मिता कहती हैं कि कांग्रेस पार्टी ने मल्लिकार्जुन खरगे को कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में चुना है। राहुल गांधी, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी समेत पूरी पार्टी कांग्रेस अध्यक्ष के पीछे खड़ी है। केवल एक कदम से परिवारवाद का भाजपा का आरोप ठंडा पड़ चुका है।

अब कांग्रेस अध्यक्ष पार्टी को चला रहे हैं: रोहन गुप्ता
कांग्रेस के प्रवक्ता रोहन गुप्ता कहते हैं कि बड़े लंबे समय से भाजपा के हाथ खाली हैं। कांग्रेस को पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरग़े चला रहे हैं। इससे जहां भाजपा के परिवारवाद के आरोप को बड़ा झटका लगा है, वहीं राहुल गांधी के संयमित, संक्षिप्त वक्तव्य से भी भाजपा के नेताओं को प्रधानमंत्री मोदी बनाम राहुल गांधी का प्रोपैगैंडा फैलाने का अवसर नहीं मिल पा रहा है। जबकि भाजपा के नेता राहुल गांधी के खिलाफ बोलने, उन्हें घेरने की कोशिश का कोई अवसर नहीं छोड़ रहे हैं। केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी इसमें सबसे आगे हैं। रोहन के मुताबिक विपक्षी एकता की पटना की बैठक हो या बेंगलुरू में हुई पहल दोनों में पार्टी का पक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ही रखा। उच्चतम न्यायालय का फैसला आने के बाद कांग्रेस मुख्यालय में भी मल्लिकार्जुन खरगे ही बोले।  
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सदस्यता जाने के बाद मिली राहुल को सहानुभूति
सुष्मिता देव कहती हैं कि मोदी सरनेम प्रकरण में अदालत का आदेश आना और राहुल गांधी की सदस्यता का जाना भाजपा को बड़ा झटका दे रहा है। सत्ताधारी दल ने जिस तरह से इस मामले में तत्परता दिखाई और जिस तरह से राहुल गांधी ने इसके बाद राजनीतिक व्यवहार किया, उसने कांग्रेस नेता की इमेज को काफी बनाया है। अब लोगों को राहुल गांधी की सहानुभूति मिल रही है। भाजपा अपने आप एक्सपोज हो रही है। कांग्रेस पार्टी के पूर्व केन्द्रीय मंत्री कहते हैं कि भारत जोड़ो यात्रा और राहुल गांधी द्वारा उठाए गए मुद्दे अब जनता को समझ में आने लगे हैं। सूत्र का कहना है कि राहुल गांधी ने जो मुद्दे उठाए, बाद में लोगों ने उसे देश के प्रमुख मुद्दे के रूप में देखा। दूसरे लोगों को समझ में आने लगा है कि सत्ता धारी दल और इसके नेता केवल लोगों को भ्रमित करने, बयानों में उलझाने का काम कर रहे हैं। इसलिए अब देश के लोगों को कांग्रेस और भाजपा का अंतर अपने आप समझ में आ रहा है।

भाजपा के लिए 2024 मुश्किल होगी?
विपक्ष के नेता लोकसभा चुनाव 2024 में सीट बंचवारे को कोई बड़े टकराव का विषय नहीं मान रहे हैं। संजीव सिंह कहते हैं कि बेंगलुरू में कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने पहले ही सब साफ कर दिया है। वहीं भाजपा के लिए पंजाब, पश्चिम बंगाल, म.प्र., राजस्थान, महाराष्ट्र, बिहार, छत्तीसगढ़, उ.प्र. समेत कई राज्यों के 2024 के नतीजे तंग कर सकते हैं। क्योंकि यहां से 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था। सुष्मिता देव कहती हैं कि इसका अंदेशा भाजपा पर साफ दिखाई दे रहा है। 2024 के चुनाव में कांग्रेस के 100 या इससे अधिक सीटों पर पहुंचने के बाद भाजपा स्वत: 250 के आस-पास आ जाएगी। ऐसा हुआ तो उसे अधिक सहयोगियों की जरूरत पड़ेगी। यही वजह है कि इन दिनों भाजपा एनडीए में दलों की संख्या बढ़ाने में जुटी है। जबकि इसके सामानांतर विपक्ष अपनी एकता को मजबूती देने में जुटा है। तृणमूल कांग्रेस की नेता का कहना है कि अकेले पश्चिम बंगाल में ही भाजपा को बड़ा झटका लगने वाला है। वहां से इस बार काफी संख्या में भाजपा की सीटें घटने वाली है। 

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