कांग्रेस नेता राहुल गांधी गुरुवार को अपने पिता राजीव गांधी की याद में रखे गए एक फोटो एग्जीबिशन में हिस्सा लेने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने अपने पिता द्वारा उड़ाए गए विमानों, उनके साथ उड़ान भरने और अपने चाचा संजय गांधी को याद किया। राहुल ने बताया कि उनका पसंदीदा प्लेन था डीसी-3, जिसे उनके पिता द्वारा उड़ाया गया पहला कमर्शियल प्लेन है।
राहुल गांधी ने पुराने समय को याद करते हुए कहा, "जब भी अपने पिता के साथ किसी प्लेन या हेलिकॉप्टर में होता था, तब मुझे कॉकपिट में बिठाया जाता था। वे मुझसे कॉकपिट के उपकरणों के बारे में पूछते थे। हम लोग साथ में फ्लाइट चेक करते थे। वो मुझसे कई सवाल पूछते थे।"
उन्होंने बताया, "जब मैं कॉलेज में था, तब मैंने विमान उड़ाना सीखा। हम जयपुर, उदयपुर और बॉम्बे, श्रीनगर तक गए। ये सफर काफी मजेदार होते थे, क्योंकि ये तड़के होते थे। कई बार मेंरे लिए ये काफी चौंकाने वाले होते थे। कई बार वे मेरे कमरे में आकर तैयार होने के लिए कहते थे। एक बार मैं पिता के साथ विमान की जंपसीट पर भी बैठा था। उस फ्लाइट में कुछ तकनीकी समस्या भी हो गई थी। इसलिए फ्लाइट में देरी हो गई थी। तो जब तक मेरे पिता समस्या ठीक कर रहे थे, उस दौरान मैंने विमान में काफी समय बिताया।"
संजय गांधी के हादसे को याद कर बोले- वह प्लेन नहीं ुउड़ाना चाहिए था, लेकिन उन्होंने उड़ाया
राहुल गांधी ने 1980 के उस विमान हादसे को भी याद किया, जिसमें संजय गांधी का निधन हो गया था। उन्होंने कहा, "मुझे याद है, जब हमने उड़ान भरी, वो बहुत शानदार थी। एक बार मेरे चाचा एक विशेष प्रकार का प्लेन उड़ा रहे थे- वह पिट्स था। वह बेहद तेज प्लेन था। मेरे पिता ने उनसे कहा कि ऐसा मत करो। मेरे चाचा के पास उतना अनुभव नहीं था। मेरे चाचा के पास तीन से साढ़े तीन सौ घंटे प्लेन उड़ाने का अनुभव था, वही जितना मुझे है।" राहुल बोले, "उन्हें वह प्लेन नहीं उड़ाना चाहिए था लेकिन उन्होंने उड़ाया। और वही हुआ जो उड़ाने का अनुभव न होने पर होता है। आसानी से जान जा सकती है।"
राहुल ने बताया, "जब भी मेरे पिता किसी उड़ान पर जाते थे, तब मेरी मां काफी परेशान हो जाती थीं। वे हमेशा यही बातें दोहराती थीं। एक बार कुछ समस्या हो गई थी...… कश्मीर में कहीं उनके (राजीव गांधी) विमान में कुछ समस्या थी। मुझे याद है मेरी मां एकदम परेशान हो गई थीं।"
'पायलटों के पास बड़े सिस्टम को देखने की क्षमता, पिता को इससे काफी मदद मिलती थी'
आप जानते हैं कि पायलटों के पास एक बहुत ही विशेष क्षमता होती है जो उनके प्रशिक्षण से आती है, आपको 30,000 फीट की दृष्टि से कॉकपिट में विवरण के साथ यात्रा करनी है। अगर आप कॉकपिट में ट्रैक खो देते हैं, तो आप मुसीबत में पड़ सकते हैं। पायलट जब उड़ान भरते हैं, तो उनकी कल्पनाएं नीचे की सड़कों, रेल लाइन से बंद नहीं होतीं। उनकी कल्पना 30 हजार फीट पर होती हैं, इसलिए उनके पास बड़े सिस्टम को देखने की क्षमता होती है।
राहुल ने कहा, "इससे मेरे पिता की काफी मदद होती थी। मैंने इस प्रक्रिया को तब देखा, जब मेरे पिता लोगों से मिलते थे, उनकी जानकारी लेते थे, उन्हें समझते थे और फिर तुरंत ही तीस-चालीस हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ जाते थे और बड़ी तस्वीर की ओर देखते थे। उनका काम इन्हीं दोनों परिप्रेक्ष्यों के बीच आगे बढ़ता रहता था। यह समझना की कल्पना हमेशा किसी भी विचार को जोड़ने का काम कर सकती थी, मेरे पिता के पास यह खूबी मेरे हिसाब से सबसे ताकतवर चीज थी।
राहुल ने एक तस्वीर दिखाते हुए कहा, "यह ए-320 एयरबस है। उनकी एक बड़ा खेद यही था कि उन्होंने एयरलाइन छोड़ दी और कभी बड़े विमान नहीं उड़ा पाए।"