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राफेल मामले में किस पर लगेगी '302': 'जेपीसी' जांच के लिए क्यों अड़ी है कांग्रेस?

सार

खेड़ा ने भाजपा से कई सवाल पूछे हैं। क्या राफेल डील में नो करप्शन क्लॉज हटाते हुए भाजपा के प्रधानमंत्री पकड़े गए हैं। इसमें 526 करोड़ का विमान 1670 करोड़ में खरीदने के लिए प्रधानमंत्री खुद विदेश चले जाते हैं। ट्रांसफर ऑफ टेक्नॉलॉजी निरस्त कर दी जाती है। बिना टेंडर के इतना बड़ा सौदा कर दिया जाता है, क्या ये हैरानी वाली बात नहीं है...
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राफेल - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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'राफेल' लड़ाकू जहाज खरीद का मामला अब दोबारा चर्चा में आ रहा है। कांग्रेस के नेता पवन खेड़ा ने सुशेन गुप्ता को लेकर बड़ा खुलासा किया है। सुशेन इस डील में एक बिचौलिए रहे हैं। खेड़ा ने कहा कि राफेल जहाज बनाने वाली कंपनी 'दसॉल्ट' ने गुप्ता को वर्ष 2000 में हायर किया था। तब देश में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी। बिचौलिये को गोपनीय रूप से करीब 7.5 मिलियन यूरो का भुगतान किया गया। उसे दो मिलियन यूरो 2004 में मिले, जबकि नौ लाख यूरो 2002 से 2004 के बीच उसकी कंपनी में ट्रांसफर किए गए थे। खेड़ा का आरोप है कि इंडियन नेगोसिएशन टीम के आंतरिक दस्तावेज, गोपनीय दस्तावेज, ये सब तो भाजपा सरकार में लीक हुए हैं।

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सुशेन गुप्ता के घर से ईडी ने ऐसे दस्तावेजों की बरामदगी की है। राफेल सौदे की फाइलें दसॉल्ट कंपनी, सुशेन गुप्ता और भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय, इन तीन जगहों पर ही घूमती रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे में किसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए? 'मर्डर' जिसके वक्त नहीं हुआ हो आईपीसी की धारा 302 उस पर कैसे लगेगी। 302 तो उस पर लगेगी, जिसके सामने, जिसके वक्त, जिसकी नाक के नीचे मर्डर हुआ है। बतौर कांग्रेस नेता, राफेल सौदे की हर फाइल को भाजपा सरकार में मंजूरी मिली है, इसलिए अब इस मामले की जांच के लिए जेपीसी का गठन किया जाना चाहिए।

फ्रांसीसी खोजी पत्रिका 'मीडियापार्ट' ने किया ये दावा  

राफेल लड़ाकू जहाज खरीद मामले में फ्रांसीसी खोजी पत्रिका 'मीडियापार्ट' ने गोपनीय तरीके से घूस दिए जाने का दावा किया है। दसॉल्ट एविएशन ने भारत से यह सौदा हासिल करने में मदद देने के लिए एक बिचौलिये को भुगतान किया था। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने फ्रांसीसी मैगजीन की रिपोर्ट के हवाले से कहा कि राफेल सौदे में भ्रष्टाचार यूपीए के कार्यकाल में ही हुआ है। पात्रा का कहना है कि यह सारा मामला 2007 से 2012 के बीच का है। अब दलाल सुशेन गुप्ता का नाम भी सामने आ गया है। इस व्यक्ति का नाम अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले से भी जुड़ा रहा है। अगस्ता वेस्टलैंड केस में वह कमीशन एजेंट रहा था। इन आरोपों का जवाब देते हुए कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा, 526 करोड़ की चीज बिना टेंडर के 1670 करोड़ में खरीद ली गई। राफेल डील में 41 हजार करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है।  

खेड़ा ने भाजपा से कई सवाल पूछे हैं। क्या राफेल डील में नो करप्शन क्लॉज हटाते हुए भाजपा के प्रधानमंत्री पकड़े गए हैं। इसमें 526 करोड़ का विमान 1670 करोड़ में खरीदने के लिए प्रधानमंत्री खुद विदेश चले जाते हैं। ट्रांसफर ऑफ टेक्नॉलॉजी निरस्त कर दी जाती है। बिना टेंडर के इतना बड़ा सौदा कर दिया जाता है, क्या ये हैरानी वाली बात नहीं है। रक्षा मंत्रालय को नजरंदाज किसने किया। हैरानी की बात तो ये है कि दलाल सुशेन गुप्ता के घर से डील के कागजात बरामद हो गए, मगर अब 26 महीने बाद भी उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी। पवन खेड़ा ने पूछा कि अब बताएं कि 302 किस पर लगनी चाहिए। सारी बातें स्पष्ट हो गई हैं।

क्या आज भी दसॉल्ट का दलाल है गुप्ता

पवन खेड़ा ने सवाल किया कि आज तक गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उसे क्यों जाने दिया गया, क्या इसलिए कि आज भी वो दसॉल्ट का दलाल है। अगर गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई होती तो संभव था कि दसॉल्ट के खिलाफ भी एक्शन लेने की राह मिल जाती। बैंक गारंटी आप नहीं लेते, आरोप हम पर लगाते हैं। राफेल सौदा, हम तो निविदा से कर रहे थे। उसमें बाकायदा एंटी करप्शन क्लॉज भी शामिल था। उसे तो भाजपा की सरकार ने हटाया। रक्षा मंत्रालय को बायपास कर दिया गया। कानून मंत्रालय को ओवर रुल कर दिया गया। ईडी ने राफेल से जुड़ी फाइल बरामद की। रक्षा मंत्रालय की आंतरिक केल्कुलेशन एक दलाल के घर पर मिल रही है, इससे बड़ी बात क्या हो सकती है। उसमें 36 विमानों की कीमत 5.9 बिलियन यूरो से बढ़ा कर 7.8 बिलियन करने जैसे दस्तावेज शामिल हैं। यही 'एग्जेक्ट फिगर' सुशेन गुप्ता ने एक नोट के जरिए दसॉल्ट को दी थी। दसॉल्ट ने उसे कोट किया। भारत सरकार ने रक्षा मंत्रालय को ओवर रुल कर 5.87 बिलियन कीमत को बढ़ा कर 7.8 बिलियन कर दिया। पवन खेड़ा ने कहा, दसॉल्ट ने जो फिगर कोट की है, उससे तीन लोग सहमत थे। दसॉल्ट, सुशेन गुप्ता और पीएम मोदी। ऐसे में किसके खिलाफ एक्शन होना चाहिए, ये बताने की अब जरुरत नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने जेपीसी को लेकर कोई बात नहीं कही

पवन खेड़ा ने कहा, मिडलमैन से जुड़े जो नए तथ्य सामने आए हैं, सरकार ने उस पर कार्रवाई नहीं की। कांग्रेस पार्टी ने जेपीसी की मांग की है। राफेल केस में देश के शीर्ष नेतृत्व की ओर इशारा करने वाले हर परिस्थितिजन्य साक्ष्य हैं। सच को सामने आना ही होगा। सीबीआई और ईडी, फिल्मी सितारों और अन्य छोटे अपराधियों पर छापेमारी करने में बहुत व्यस्त हैं। उनके पास खुद की जांच करने का समय नहीं है, इसलिए हम सीबीआई से निष्पक्ष रूप से जांच करने की उम्मीद नहीं कर सकते। देश को 41 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, सरकार को उसकी चिंता नहीं है। यह सब जेपीसी जांच में सामने आ सकता है।

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