सेना में बतौर 'अग्निवीर' भर्ती हुए युवाओं को क्या चार साल बाद गारंटी से सरकारी नौकरी मिल पाएगी, इस बाबत सवाल खड़े हो रहे हैं। केंद्र सरकार ने पिछले दिनों केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में अग्निवीरों को दस फीसदी आरक्षण देने की बात कही थी। कांग्रेस पार्टी के पूर्व सैनिक विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष कर्नल रोहित चौधरी ने इस आरक्षण के फॉर्मूले पर सवाल उठाते हुए कहा, अग्निवीरों को सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण, 2 करोड़ रोजगार की तरह एक जुमला है। जब मोदी सरकार 15 साल के प्रशिक्षित जवान को नौकरी नहीं दे पा रही, तो महज 4 साल के प्रशिक्षित अग्निवीर को नौकरी कैसे दे सकेगी। क्या 10वीं पास अग्निवीर युवा 4 साल बाद किसी सरकारी नौकरी का पेपर पास कर पाएगा।
लोकसभा चुनाव के बाद हुए संसद के विशेष सत्र में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अग्निवीरों का मुद्दा उठाया था। उन्होंने अग्निवीरों को सेवा के दौरान ग्रेच्युटी के अलावा अन्य लाभ न मिलने और उनके परिवार को पेंशन से वंचित करने की आलोचना की थी। राहुल गांधी ने दावा किया था कि सरकार अग्निवीरों को इस्तेमाल करके उन्हें फेंक देने वाले मजदूर के रूप में देखती है। उन्हें शहीद का दर्जा भी नहीं देती। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में अग्निवीर भर्ती को लेकर राहुल गांधी के दावों का खंडन करते हुए कहा था कि 158 संगठनों से सुझाव लेने के बाद अग्निपथ योजना को लागू किया गया था।
राहुल के बयान के बाद सीआरपीएफ, बीएसएफ और सीआईएसएफ के महानिदेशकों ने कहा था, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सीएपीएफ में सिपाही के 10 फीसदी पद भूतपूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षित कर दिए हैं। अग्निवीरों को केंद्रीय पुलिस बलों में नौकरी भी मिलेगी। उन्हें फिजिकल टेस्ट में छूट दी जाएगी। कांग्रेस पार्टी के पूर्व सैनिक विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष कर्नल रोहित चौधरी ने अग्निवीरों के लिए घोषित की गई दस फीसदी आरक्षण व्यवस्था पर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, क्या 10वीं पास अग्निवीर युवा 4 साल बाद किसी सरकारी नौकरी का पेपर पास कर पाएगा। क्या 4 साल सेना में रहने के बाद एक जवान फिर से पढ़ाई शुरू कर सकता है। सेना में फिजिकल वर्क ज्यादा रहता है।
डीजीआर रिपोर्ट, जून 2021 के अनुसार, देश में पूर्व सैनिकों के 95 फीसदी (7.70 लाख) आरक्षित पद खाली क्यों पड़े हैं। जब मोदी सरकार 15 साल के प्रशिक्षित जवान को नौकरी नहीं दे पा रही है, तो महज 4 साल की सेवा के बाद रिटायर होने वाले प्रशिक्षित अग्निवीर को नौकरी कैसे देगी। बतौर कर्नल रोहित चौधरी, केंद्र सरकार अग्निवीर को फिजिकल व मेडिकल में छूट देने की बात कर रही है, लिखित परीक्षा में क्यों नहीं। क्या लिखित परीक्षा में पूर्व सैनिक व अग्निवीर जवान मिनिमम पासिंग मार्क्स 40 फीसदी ला सकते हैं। यहां पर एक अहम सवाल यह भी है कि देश में शहीद हुए 15 अग्निवीरों में से 9 केस सुसाइड व संदिग्ध हालात में मौत के क्यों हैं। ये बहुत भयावह स्थिति है कि एक साल के अंदर 15 अग्निवीर शहीद हो चुके हैं। इनमें 9 से ज्यादा केसों में सुसाइड व संदिग्ध हालात में मौत हुई है।
चौधरी ने केंद्र सरकार से सवाल किया है कि सेना में अग्निवीर जवान लगातार सुसाइड क्यों कर रहे हैं। क्या अग्निवीरों को पर्याप्त ट्रेनिंग मिल पा रही है। क्या छह महीने का प्रशिक्षित अग्निवीर सेना में काम करने के लिए शारीरिक व मानसिक रूप से सक्षम है। पिछले एक साल में कितने 'सामान्य' सैनिकों ने सुसाइड किया है। उक्त अवधि के दौरान कितने 'अग्निवीर' सैनिकों ने सुसाइड किया। सरकार, संसद में श्वेत पत्र लेकर आए कि अग्निवीर सैनिक व रेगुलर सैनिक में भेदभाव क्यों है।
संसद में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी कह चुके हैं कि इंडिया गठबंधन की सरकार बनने पर अग्निवीर योजना रद्द की जाएगी। अग्निवीर योजना में शहीद होने पर युवाओं को न शहीद का दर्जा मिलेगा, न ही पेंशन मिलेगी। उन्हें न ही कोई अन्य सुविधा मिलेगी। चार साल बाद युवा फिर बेरोजगार हो जाएंगे। अग्निवीर योजना सेना की योजना नहीं थी, यह प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा बनाई गई थी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अग्निवीर भर्ती को लेकर राहुल गांधी के दावों का खंडन करते हुए कहा था कि 158 संगठनों से सुझाव लेने के बाद अग्निपथ योजना को लागू किया गया था।