भारत के प्रधान न्यायाधीश एनवी रमण ने पूर्व प्रधानमंत्री पी वी नरसिंह राव को देश में आर्थिक सुधारों का जनक बताया है। जस्टिस रमण ने कहा कि विवाद के समाधान के लिए बातचीत और मध्यस्थता भारतीय संस्कृति का हिस्सा हैं।
हैदराबाद में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता और मध्यस्थता केंद्र के पंजीयन के अवसर पर बोलते हुए जस्टिस रमण ने कहा कि शहर एक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र के लिए उपयुक्त है और इस केंद्र के माध्यम से विवादों के समाधान की लागत अन्य देशों की तुलना में बहुत सस्ती होगी।
सीजेआई रमण ने कहा, 'आप जानते हैं कि देश में आर्थिक सुधारों के जनक कोई और नहीं बल्कि तेलंगाना बिड्डा (तेलंगाना के बेटे) पी वी नरसिंहराव हैं। उनके नेतृत्व में भारत में पहली बार आर्थिक सुधार शुरू हुए। मध्यस्थता कोई नई चीज नहीं है। भारतीय संस्कृति में हम अपने सभी विवादों को मध्यस्थता और बातचीत और सुलह के माध्यम से सुलझाते हैं। हर दिन हम अपने बच्चों, भाइयों और दोस्तों के साथ बातचीत करते हैं।
न्यायमूर्ति रमण ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एल नागेश्वर राव और पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवींद्र हैदराबाद मध्यस्थता केंद्र के आजीवन न्यासी होंगे और वे भविष्य में कुछ और सदस्यों को शामिल करेंगे।जस्टिस रमण ने राज्य सरकार और तेलंगाना उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश हिमा कोहली से कहा कि वे कंपनियों को मध्यस्थता के माध्यम से अपने विवादों को निपटाने के लिए प्रोत्साहित करें। हैदराबाद मध्यस्थता केंद्र को विवाद समाधान में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित केंद्र बनना चाहिए।
सीजेआई रमण ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव को उनके प्रस्ताव पर शीघ्र कार्रवाई करने और केंद्र शुरू करने के लिए आवश्यक व्यवस्था करने के लिए धन्यवाद दिया।