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Purvanchal Expressway : भारतीय सैन्य ताकत को कैसे मिलेगी मजबूती, चीन के लिए क्या है संदेश

प्रतिभा ज्योति
Updated Tue, 16 Nov 2021 01:46 PM IST

सार

पूर्वांचल एक्सप्रेस इस तरह से विकसित गया है कि कोई भी लड़ाकू विमान यहां उतर सके और उड़ान भर सके। भारतीय वायु सेना के साथ नियमित बातचीत के आधार पर इसे तैयार किया गया है। भारतीय वायु सेना, सीमा सड़क संगठन, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय और राज्य सरकार ने मिलकर यह सुनिश्चित किया है कि सड़क या एक्सप्रेस वे की गुणवत्ता भारतीय वायुसेना के विमानों की लैंडिंग और टेकऑफ के उपयोग के हिसाब से हो। 
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पूर्वांचल एक्सप्रेस वे - फोटो : amar ujala
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को 341 किलोमीटर पूर्वांचल एक्सप्रेस का उद्घाटन किया। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे योगी आदित्यनाथ का मेगा प्रोजेक्ट है। इस एक्सप्रेस वे पर सुल्तानपुर जिले के पास 3.2 किलोमीटर की दूरी विकसित कर रन वे का निर्माण किया गया है जहां आपात स्थिति में लड़ाकू विमान उतर सकते हैं और उड़ान भर सकते हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा और सामरिक दृष्टि के लिहाज से इस एक्सप्रेस वे की अहम भूमिका मानी जा रही है। भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमान आज एयर शो के जरिए पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से उड़ान भरकर अपनी ताकत दिखाएंगे और फाइटर एयरक्राफ्ट सुखोई, जगुआर और मिराज फ्लाई पास्ट करके अपना जलवा दिखाने वाले हैं। 'टच एंड गो' ऑपरेशन के तहत लड़ाकू विमान एक्सप्रेस-वे को छूएंगे और फिर उड़ान भरेगें। 


सोशल मीडिया पर एक्सप्रेस-वे पर विमान की लैंडिंग के रिहर्सल का वीडियो वायरल हो रहा है। रविवार को एक क्लिप में मिराज 2000, एक एएन-32 टर्बोप्रॉप और एक सुखोई-30 को राज्य की राजधानी लखनऊ से लगभग 100 किलोमीटर दूर राजमार्ग पर उतरते देखा गया। माना जा रहा है कि एक्सप्रेस वे पर हवाई पट्टी का निर्माण करके भारत ने खासतौर पर चीन को यह संदेश दिया है कि देश ने सामारिक ताकत में इजाफा करने के लिए एक और मजबूत कदम उठाया है। 

2017 में, 16 भारतीय वायु सेना के विमानों ने लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे के एक हिस्से पर लैंडिंग और टच-एंड-गो युद्धाभ्यास किया था। उस समय, C-130J सुपर हरक्यूलिस विमान विशेष बल कमांडो के साथ ड्रिल के हिस्से के रूप में उतरा था।



 
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पूर्वांचल एक्सप्रेस वे - फोटो : amar ujala
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को 341 किलोमीटर पूर्वांचल एक्सप्रेस का उद्घाटन किया। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे योगी आदित्यनाथ का मेगा प्रोजेक्ट है। इस एक्सप्रेस वे पर सुल्तानपुर जिले के पास 3.2 किलोमीटर की दूरी विकसित कर रन वे का निर्माण किया गया है जहां आपात स्थिति में लड़ाकू विमान उतर सकते हैं और उड़ान भर सकते हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा और सामरिक दृष्टि के लिहाज से इस एक्सप्रेस वे की अहम भूमिका मानी जा रही है। भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमान आज एयर शो के जरिए पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से उड़ान भरकर अपनी ताकत दिखाएंगे और फाइटर एयरक्राफ्ट सुखोई, जगुआर और मिराज फ्लाई पास्ट करके अपना जलवा दिखाने वाले हैं। 'टच एंड गो' ऑपरेशन के तहत लड़ाकू विमान एक्सप्रेस-वे को छूएंगे और फिर उड़ान भरेगें। 

सोशल मीडिया पर एक्सप्रेस-वे पर विमान की लैंडिंग के रिहर्सल का वीडियो वायरल हो रहा है। रविवार को एक क्लिप में मिराज 2000, एक एएन-32 टर्बोप्रॉप और एक सुखोई-30 को राज्य की राजधानी लखनऊ से लगभग 100 किलोमीटर दूर राजमार्ग पर उतरते देखा गया। माना जा रहा है कि एक्सप्रेस वे पर हवाई पट्टी का निर्माण करके भारत ने खासतौर पर चीन को यह संदेश दिया है कि देश ने सामारिक ताकत में इजाफा करने के लिए एक और मजबूत कदम उठाया है। 

2017 में, 16 भारतीय वायु सेना के विमानों ने लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे के एक हिस्से पर लैंडिंग और टच-एंड-गो युद्धाभ्यास किया था। उस समय, C-130J सुपर हरक्यूलिस विमान विशेष बल कमांडो के साथ ड्रिल के हिस्से के रूप में उतरा था।



 

पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर 16 नवंबर से फर्राटा भरेगा यूपी - फोटो : अमर उजाला
सेना के लिए बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर
भारतीय सेना दो मोर्चों पर युद्ध के खतरे से जूझती रहती है। एक तरफ चीन और दूसरी तरफ पाकिस्तान। इसलिए सरकार और भारतीय वायु सेना सशस्त्र बलों के लिए बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दे रही है। केंद्र ने सड़कों और राजमार्गों को इस तरह से विकसित करने की पहल की है कि संकट या आपात स्थिति के दौरान लड़ाकू विमानों को उतरने और उड़ान भरने की अनुमति मिल सके। पूर्वांचल एक्सप्रेस वे पर सड़क निर्माण एजेंसियों ने भारतीय वायु सेना के परामर्श से सड़कों और राजमार्गों के डिजाइन को तैयार किया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जब भी आवश्यक हो लड़ाकू जेट इसका इस्तेमाल कर सकें।

हमने रक्षा विशेषज्ञों की मदद से यह जानने की कोशिश की है कि पूर्वांचल एक्सप्रेस वे पर रन वे के निर्माण से हमारी सैन्य ताकत किस तरह मजबूत होने वाली है। 

अहम सामारिक महत्व

रक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल ए जे बी जैनी (सेवानिवृत्त) इसे देश  की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सैन्य विस्तार के रूप में देखते हैं।  उनका कहना है यहां से चीन की सीमा 600 किलोमीटर दूर है। इस लिहाज से इस एक्स्प्रेस वे का सामरिक महत्व बहुत बढ़ जाता है। इमरजेंसी लैंडिंग करने के लिए भारतीय वायु सेना बरेली, आगरा या अंबाला एयरस्पेस का इस्तेमाल करती थी। उत्तर प्रदेश से चीन को घेरने या पाकिस्तान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई के लिए हिंडन और आगरा एयरबेस के अलावा अब जरूरत करने पर इस एक्सप्रेस वे के रन वे का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। 
 

चीन की सेना(फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई
चीन पर पड़ेगा मनोवैज्ञानिक प्रभाव 
उनके मुताबिक चीन पर इसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी पड़ सकता है। चीन को भारतीय वायु सेना के मजबूत होने का संदेश मिलेगा क्योंकि अब उत्तरी और पूर्वी बॉर्डर के नजदीक होने की वजह से यहां दोनों ही फ्रंट पर आसानी से फाइटर विमानों की लैंडिंग हो सकती है या टेकऑफ कराया जा सकता है। यदि कभी चीन के साथ युद्ध की नौबत आती है तो आपातकाल में इस एक्सप्रेस का इस्तेमाल आसानी से हो सकता है। सैटेलाइट कम्यूनिकेशन के जमाने में नार्मल ट्रैफिक को रोककर ऐसा आसानी से किया जा सकता है। वे मानते हैं कि एक बार रनवे बन जाने से एयरपोर्ट के लिए जरूरी संसाधनों का विकास भी किया जा सकता है। यहां फ्यूल रखा जा सकता है और एयरपोर्ट के लिए जो भी जरूरी चीजें हैं उन सुविधाओं का विकास भी किया जा सकता है।

मूवेबल एयरफील्ड की तरह काम ले सकते हैं
रक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल ए के सिवाच (रिटायर्ड) कहते हैं कि इस एक्सप्रेस पर रन वे के निर्माण से सेना का लचीचापन बढ़ा जाएगा।  देश भर में सेना की पहुंच को बढाने की दिशा में यह एक बेहतर कदम है। यह एक तरह से मूवेबल एयरफील्ड है जिससे वायु सेना की काबलियत और ताकत बढ़ गई है। कई बार युद्ध के समय एयरफील्ड को दुश्मन सेना ऑउट ऑफ ऑपरेशन कर देती है या कई बार दूसरी वजहों से भी एयरस्पेस को नुकसान पहुंचता है। जैसा कि 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान अंबाला एयरफिल्ड को पाकिस्तानी वायु सेना ने नॉन ऑपरेटिव कर दिया था। ऐसे हालात में तो पूर्वांचल एक्सप्रेस को एयर फील्ड की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। जिस प्रकार से कॉम्बैट एयरफिल्ड का इस्तेमाल किया जाता है उसी तरह इस एक्सप्रेस वे को भी सामान ढोने वाले और लड़ाकू विमानों दोनों के लिए उपयोग किया जा सकता है।

पश्चिमी यूरोप और अमेरिका में नई बात नहीं
मेजर जनरल ए वी जैनी का कहना है कि एक्सप्रेस वे पर रन वे बनाना बाहरी देशों के कोई नई बात नहीं है। पश्चिमी यूरोप और अमेरिका में कई हाईवे ऐसे हैं जहां समतल जमीन है उसका एयर स्पेस की तरह इस्तेमाल किया जाता है। हमारे देश में यह नया कांसेप्ट है जो भारतीय वायु सेना की कई जरूरतों को पूरा करेगा। सिवाच भी कहते हैं सभी बड़े देश इसी तरह से हाईवे बना रहे हैं और भारत को ज्यादा से ज्यादा हाईवे को इसी तरह से तब्दील करना चाहिए, जिससे भारतीय सेना देश के किसी भी हिस्से से दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दे सके।  

 
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