अन्ना अपने आंदोलन से राजनीति को दूर रखते थे, लेकिन इस आंदोलन के खत्म होते ही आम आदमी पार्टी का जन्म हुआ।
नवंबर 2012 में आम आदमी पार्टी का आधिकारिक तौर पर गठन हुआ।
तब वकील और कार्यकर्ता शांति भूषण, प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव, कुमार विश्वास केजरीवाल के साथी थे।
2012 में बनी आम आदमी पार्टी ने 2013 में दिल्ली में अपना पहला चुनाव लड़ा। सरकार भी बनाई।
70 सीटों वाली दिल्ली विधानसभा में आप दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। उसे 28 सीटें मिलीं।
कांग्रेस ने उसे बाहर से समर्थन दिया और दिल्ली में केजरीवाल की सरकार बन गई। हालांकि 49 दिन बाद केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया।
2014 लोकसभा चुनाव में बेहद खराब प्रदर्शन रहा। 400 सीटों पर चुनाव लड़ा, 4 पर जीत मिली।
2015 दिल्ली विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत मिली। 2017 दिल्ली नगर निगम और 2019 लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन रहा।
अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान।
- फोटो : twitter @ArvindKejriwal
अरविंद केजरीवाल पर कुमार विश्वास ने लगाया आरोप।
- फोटो : फाइल
साथी जो बिछड़े बारी-बारी
अरविंद केजरीवाल की नेतृत्व वाली पार्टी ने 2015 में 70 सीटों वाली दिल्ली विधानसभा में 67 सीटें जीतकर राज्य में सत्ता बरकरार रखने की कोशिश की थी।
लेकिन, पांच साल के उनके सफर में कई साथियों ने साथ छोड़ दिया या वे बाहर कर दिए गए।
पत्रकार आशुतोष पार्टी की सरोकार और साफ-सुथरी राजनीति से प्रभावित होकर 2014 में पार्टी में शामिल हुए थे।
वे 2014 का लोकसभा चुनाव भाजपा के हर्षवर्धन के खिलाफ चांदनी चौक से लड़ा थे, लेकिन वे हार गए थे।
बाद में धीरे-धीरे वे आम आदमी पार्टी से दूर होते गए। 2018 में उन्होंने पार्टी छोड़ दी और पत्रकारिता में वापसी की।
आप के सह-संस्थापकों में से एक शाजिया इल्मी ने मई 2014 में यह कहते हुए पार्टी छोड़ दी कि वह अपने मूल मूल्यों से भटक गई है।
बाद में वह भाजपा में शामिल हो गईं। अभी वे भाजपा की मुख्य प्रवक्ता हैं।
कुमार विश्वास भी केजरीवाल के साथ कथित मतभेदों के कारण वे पार्टी से अलग हो गए।
वहीं सह-संस्थापकों में से एक योगेंद्र यादव को मार्च 2015 में पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण निष्कासित कर दिया गया था।
बाद में उन्होंने चुनावी राजनीति में ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के मिशन के साथ एक अलग पार्टी 'स्वराज इंडिया' की स्थापना की।
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील 2012 में आप में इस उम्मीद के साथ शामिल हुए कि यह पार्टी भ्रष्टाचार से मुक्त होगी।
हालांकि, उन्हें भी योगेंद्र यादव के साथ पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण पार्टी से बर्खास्त कर दिया गया था। बाद में प्रशांत भूषण ने खुद को राजनीति से दूर कर लिया।
पार्टी के पूर्व नेता कपिल मिश्रा ने सीएम केजरीवाल और दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के खिलाफ सार्वजनिक तौर पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
उन्होंने खुद को दो करोड़ रुपये के घोटाले का चश्मदीद गवाह भी बताया तो कपिल मिश्रा को मई 2017 में निलंबित कर दिया।
इसी तरह किसी न किसी वजह से अल्का लांबा और अंजलि दमानिया भी पार्टी से दूर हो गईं।