आम आदमी पार्टी पंजाब फतह करने के लिए दिल्ली मॉडल को आगे बढ़ा रही है और कांग्रेस आप की राह आसान करने के लिए अपने घर में कांटे बिछाती जा रही है। आम आदमी पार्टी ने पंजाब में भी दिल्ली मॉडल को अपनाने के लिए यहां फ्री बिजली के साथ-साथ फ्री स्वास्थ्य सेवा भी देने का वादा करके अपने सियासी बिसात बिछा दी है। 2017 में पार्टी ने बढ़िया प्रदर्शन करते हुए 20 सीटें जीत कर राज्य में मुख्य विपक्षी दल की हैसियत हासिल कर ली। अब अरविंद केजरीवाल कांग्रेस के आंतरिक संकट और सत्ता विरोधी लहर पर सवार होकर शानदार प्रदर्शन करने और यहां सरकार बनाने की उम्मीद लगा रहे हैं।
कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की कथित बेअदबी के बाद उनके कांग्रेस से बाहर निकलने और पंजाब कांग्रेस प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू के इस्तीफे के बाद राज्य में राजनीतिक समीकरण जिस तरह से बदल गए हैं, इससे राजनीतिक पंडित इस बात का अनुमान लगा रहे हैं कि सत्ता में आने का आप का सपना इस चुनाव में पूरा हो सकता है। पार्टी को सबसे ज्यादा फायदा कांग्रेस की कलह से मिल सकता है, पार्टी नेताओं ने इसे साल की शुरुआत में ही इस बात को भांप लिया था। कांग्रेस की अस्थिरता का फायदा उठाने के लिए आप नेताओं ने अपने संगठन को मजबूत करने के लिए कड़ी मेहनत शुरू कर दी।
एक सर्वे में भी यह बात सामने आई है कि पंजाब में आम आदमी पार्टी को सत्ता में आने के आसार बढ़ गए। 117 विधानसभा सीटों वाले पंजाब में आम आदमी पार्टी को 35.1 फीसदी वोटों के साथ 51 से 57 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। आप नेता इस सर्वे के नतीजे आने के बाद बेहद उत्साहित है।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं राज्य विधानसभा चुनाव से महज कुछ महीने पहले कांग्रेस के सियासी संकट से अगर किसी की पांचों उंगलियां घी में है तो वह है आम आदमी पार्टी। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी आज एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में यह बात स्वीकार की है कि राज्य में आम आदमी पार्टी की लोकप्रियता बढ़ रही है।
एक विशेषज्ञ का अनुमान है कि कांग्रेस की लड़ाई से आम आदमी पार्टी को सबसे ज्यादा फायदा पहुंचने वाला है, इतना फायदा तो अकाली दल और बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन को भी नहीं मिलेगा। कांग्रेस की अंदरूनी कलह और सियासी ड्रामे की वजह से आम आदमी पार्टी की बल्ले-बल्ले हो रही है।