पूर्व उद्योग मंत्री एकनाथ खडसे
- फोटो : ANI
भाजपा से राकांपा में शामिल हुए पूर्व उद्योग मंत्री एकनाथ खडसे को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। पुणे के बहुचर्चित जमीन घोटाला मामले में ईडी ने चार्जशीट दायर की है। इसमें आरोप लगाया गया है कि खडसे के परिजनों ने ने इस जमीन के पूर्व मालिक के वैध वारिसों के साथ समझौता किया था। इसका मकसद महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम MIDC से मुआवजा पाना था।
बता दें, महाराष्ट्र के राकांपा नेता एकनाथ खडसे, उनकी पत्नी मंदाकिनी खडसे और दामाद गिरीश चौधरी ईडी के घेरे में हैं। तीन सितंबर को इस मामले में चार्जशीट दाखिल की गई है। इसमें एकनाथ खडसे, उनकी पत्नी मंदाकिनी खडसे और रविंद्र मुले और बेंचमार्क बिल्डकॉन प्रालि को आरोपी बनाया गया है। मामले में सात जुलाई को गिरीश चौधरी को गिरफ्तार किया गया था। ईडी ने अब तक मामले में 5.73 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की है।
खडसे व परिजनों के बारे में ईडी ने चार्जशीट में बड़ा खुलासा किया है। कहा गया है कि खडसे व उनके परिजनों ने पुणे में एमआईडीसी के भूखंड की औपचारिक बिक्री से ठीक पहले इसके मालिक के वारिसों से एक करार किया था। इसमें एमआईडीसी से मिलने वाला मुआवजा खडसे के परिजनों को देने की शर्त थी।
यह समझौता 28 मार्च 2016 को प्लॉट के पूर्व मालिक अब्बास उकानी के कानूनी वारिस एम हसनैन जोएब उकानी और मंदाकिनी खडसे, गिरीश चौधरी के बीच किया गया था। इसमें जोएब उकानी 50 लाख रुपये लेकर प्लॉट को ट्रांसफर करने के लिए तैयार हो गए थे। गिरीश ने यह राशि जोएब के खाते में मार्च 2016 को ट्रांसफर की थी। ताकि एमआईडीसी से मुआवजे के रूप में 22.78 करोड़ रुपये की राशि उन्हें मिल सके।
इस तरह की गई हेराफेरी
ईडी के अनुसार जमीन का मुआवजा प्राप्त करने के इरादे से खडसे ने उद्योग मंत्री रहते हुए 12 अप्रैल 2016 को एक बैठक बुलाई। एमआईडीसी उनके अधीन ही आता था। आरोप है कि खडसे ने पद का दुरुपयोग करते हुए अधिकारियों को आदेश दिया कि इस जमीन को मालिक को वापस किया जाए और यदि यह वापस नहीं की जा सकती है तो भूमि अधिग्रहण अधिनियम के मुताबिक भूमि मालिक को मुआवजा दें। इस तरह मुआवजे का आदेश जारी करवा कर पद का दुरुपयोग किया गया।