विशेषज्ञों का कहना है कि एयरलाइंस पर सरकार को अब तक मोटी रकम खर्च करनी पड़ी है। अब भी सरकार के हिस्से बड़ी बकायेदारी रहेगी। इसका भुगतान भी करदाताओं के पैसों से ही किया जाना है। 2019 में सरकार ने स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीवी) के तहत नई कंपनी एयर इंडिया एसेट होल्डिंग लि. (एआईएएचएल) बनाकर उसमें 29,464 करोड़ रुपये डाल दिए थे। इसका मतलब है कि कंपनी के खरीदार को इस कर्ज का भुगतान नहीं करना होगा बल्कि सरकार चुकाएगी।
1.57 लाख करोड़ से ज्यादा खर्च हुए करदाताओं के 10 वर्षों में एयर इंडिया की उड़ान पर
ऐसे पड़ा 1.57 लाख करोड़ का बोझ
- मौजूदा कर्ज 46,262 करोड़
- वेंडर का बकाया 15,834 करोड़
- सितंबर-दिसंबर घाटा 2,661 करोड़
- सरकार ने लगाई पूंजी 1.10 लाख करोड़
- टाटा से मिलेंगे 2,700 करोड़
- बची संपत्ति का मूल्य 14,718 करोड़
- कुल खर्च की गई पूंजी 1,57,339 करोड़
(नोट : 2,700 और 14,718 करोड़ सरकार को वापस मिलेंगे।)
नए मालिक के लिए आसान नहीं होगी राह
- दीपम सचिव ने कहा, हम टाटा समूह को एयरलाइन सौंपने का काम जल्द पूरा करना चाहते हैं। इसकी उड़ान को बनाए रखना नए मालिक के लिए आसान नहीं होगा।
- नए मालिक को परिचालन पर काफी पैसा खर्च करना होगा। विमानों में सुधार के लिए निवेश के साथ इसे नए सिरे से तैयार करना होगा।
- बेकार पड़ चुके विमानों के लिए नए ऑर्डर देने होंगे। उसके बाद ही पुनरुद्धार संभव है।
- इसके अलावा, दिसंबर में कमान मिलने के बाद भी समूह को एयरलाइन की गैर-मुख्य संपत्तियां मसलन वसंत विहार में एयर इंडिया की आवासीय कॉलोनी, मुंबई के नरीमन पॉइंट और नई दिल्ली में उसका भवन नहीं मिलेगा।
देनदारियां चुकाने के लिए मौद्रीकरण योजना जरूरी
पांडेय ने कहा कि टाटा एक साल तक एयरलाइन के कर्मचारियों को हटा नहीं सकती। इसके बाद अगर कंपनी अपने कर्मचारियों को हटाना चाहेगी तो उसे स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) देनी होगी। उन्होंने कहा कि हमने टाटा समूह को दो साल के लिए इस्तेमाल की अनुमति दी है। इस दौरान हमें मौद्रीकरण करना होगा ताकि एआईएएचएल की देनदारियों को पूरा किया जा सके।