वॉयरोलॉजिस्ट डॉ. शाहिद जमील
- फोटो : social media
कोरोना के ओमिक्रॉन वायरस को लेकर पूरी दुनिया में बढ़ती चिंता के बीच भारत में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। केंद्र व राज्य सरकारें बचाव की तैयारियों में जुट गई हैं। इसी बीच देश के ख्यात वॉयरोलॉजिस्ट डॉ. शाहिद जमील ने देशवासियों से कहा है कि वे घबराएं नहीं। कुछ उपायों से ओमिक्रॉन या अन्य वायरस से बचाव किया जा सकता है।
भारत के कोरोना जीनोमिक कंसोर्टियम (इंसाकाग) के सलाहकार समूह के अध्यक्ष रह चुके वॉयरोलॉजिस्ट (विषाणु विज्ञानी) डॉ. शाहिद जमील ने कहा कि हमें सतर्क रहने, मास्क पहनने व कोरोना प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि जब चौथा राष्ट्रीय सीरो सर्वे हुआ था तब देश में टीकाकरण बहुत कम हुआ था। इसके बावजूद तब तक करीब 67 फीसदी यानी 93-94 करोड़ लोगों में कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबाडी बन चुकी थी। शरीर में इस एंटीबॉडी (प्रतिरक्षक तंत्र) का निर्माण कोरोना के डेल्टा और अन्य वैरिएंट से हुए व्यापक संक्रमण से हुआ था। अब यह एंटीबॉडी ओमिक्रॉन या कोरोना के अन्य वैरिएंट से भी बचाव के काम आएगी।
वैक्सीन के असर को लेकर शोध जरूरी
डॉ. जमील ने कहा कि ओमिक्रॉन के खिलाफ मौजूदा वैक्सीन के प्रभाव पर अभी और शोध की जरूरत है। जानकारी के मुताबिक ओमिक्रॉन पर मौजूदा वैक्सीन का असर कुछ हद तक कम हो सकता है, लेकिन वैक्सीन पूरी तरह से बेअसर नहीं मानी जा सकती है।
इस बीच गृह मंत्रालय ने मंगलवार को ओमिक्रॉन वैरिएंट के प्रसार को रोकने के लिए कोविड प्रोटोकॉल को 31 दिसंबर तक बढ़ा दिया है। इसके साथ ही राज्य सरकारों को भी वायरस की रोकथाम के तेजी से उपाय करने का निर्देश दिया है।