प्रो. संजीव कुमार शर्मा
- फोटो : यूट्यूब स्क्रीनग्रैब
कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने पहली की तुलना में अधिक तबाही मचाई। कोरोना की दूसरी लहर में पिछले दिनों ऑक्सीजन और अस्पताल के लिए मची दौड़ ने कई राज्यों में एक तरह से अफरातफरी का माहौल बना दिया। ऐसे हालात से फिर किसी को न गुजरना पड़े और हर कोई जागरूक बने, इसके लिए आयुष मंत्रालय और राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ के संग मिलकर अमर उजाला 14 जून से पांच दिन तक रोजाना खास वेबिनार आयोजित करने जा रहा है। इसमें जाने माने विशेषज्ञ कोविड-19 के उपचार में आयुर्वेद के महत्व को समझाएंगे। 14 से 18 जून तक प्रतिदिन शाम 5 बजे से होने वाले इस वेबिनार का अमर उजाला के फेसबुक पेज और यूट्यूब चैनल पर सीधा प्रसारण किया जाएगा।
कोविड-19 के उपचार में आयुर्वेद किस तरह फायदेमंद हो सकता है, किस तरह इसे अपनी दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है, इसे लेकर लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से इस वेबिनार का आयोजन किया जा रहा है। 'सेहत है संग तो जीतेंगे हर जंग' के ध्येय वाक्य के साथ हो रही वेबिनार में गुरुवार, 17 जून को राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर के प्रो. संजीव कुमार शर्मा शल्य तंत्र पर चर्चा कर रहे हैं। इस वेबिनार में शामिल होने के लिए अमर उजाला के फेसबुक पेज और यूट्यूब चैनल पर क्लिक करें और पेज को लाइक, शेयर तथा सब्सक्राइब जरूर करें।
क्या बोले प्रो. संजीव कुमार शर्मा
- बेहतर नींद लेना हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत अहम है। अच्छी और समय पर नींद लेना बहुत जरूरी है। रात सोने के लिए बनी है और दिन काम करने के लिए। हमें इसी व्यवस्था के अनुरूप व्यवहार करना चाहिए।
- अच्छे स्वास्थ्य में भोजन की भूमिका भी बहुत अहम है। हमें भोजन की प्रकृति के बारे में यानी यह मालूम होना चाहिए कि जो भोजन हम ले रहे हैं वह कैसा है। हमें अपनी तासीर पता होनी चाहिए।
- हमारी रसोई सबसे बड़ी फार्मेसी है। बाजार में काढ़ा बनाने की सामग्री मिलती तो है लेकिन वह कितनी अच्छी है यह कहा नहीं जा सकता। इसलिए हमें अपनी रसोई में मौजूद वस्तुओं का उपयोग कर काढ़ा बनाना चाहिए।
- भोजन किस तरह पकाया गया है, यह भी बहुत जरूरी है। इसके साथ ही हम क्या कब खा रहे हैं इसका ध्यान रखना भी बहुत जरूरी है। आयुर्वेद कहता है कि दूध में फलों को कभी भी नहीं मिलाना चाहिए।
- इसके साथ ही हम ये नहीं जानते कि कितना खाना है। कम खाना और ज्यादा खाना दोनों नुकसानदायक हैं। इसके साथ ही हम जहां हैं, वहा की भौगोलिक स्थितियों के हिसाब से भोजन करना बेहतर है।
- समय पर भोजन करना भी बहुत जरूरी है। हम इसका पालन बिल्कुल नहीं करते हैं। इसके साथ ही भोजन हमेशा शांति से, ध्यान और मन लगाकर खाना चाहिए। इससे हमारा पाचन तंत्र अच्छा होता है।
- कोरोना को लेकर लोगों के मन में भय निश्चित रूप से है। लेकिन अगर हम सारी सावधानियां रखते हैं तो कोरोना से सुरक्षित रहा जा सकता है। कोरोना से भयभीत होने की नहीं, केवल सावधान रहने की जरूरत है।
- कोरोना से बचने के लिए आयुष मंत्रालय की ओर से जारी किए गए दिशानिर्देशों का पालन करके भी बचा जा सकता है। पोस्ट कोविड अवस्था में भी आयुर्वेद और योग बहुत मददगार साबित हो सकते हैं।
- कोरोना से ठीक हो चुके लोग अपने अनुभव दूसरे लोगों के साथ साझा करें कि किस तरह उन्होंने इस बीमारी को मात दी। ऐसा करके वह समाज में सकारात्मकता फैला सकते हैं, जो अपने आप में एक इलाज है।
- कोविड के दौरान हमारे शरीर में कई विषैले पदार्थ एकत्रित हो जाते हैं। इन्हें शरीर से बाहर निकालना जरूरी है। इसके लिए तरल पेय पदार्थ जैसे पानी, जूस आदि का खूब सेवन करें। खांसी होने पर भाप लें।
- इम्यूनिटी बढ़ाने के साथ-साथ संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए नियमित मेडीटेशन और प्राणायाम करना बहुत जरूरी है। प्राणायाम करने से हमारे फेफड़ों की स्थिति और ऑक्सीजन स्तर बेहतर होता है।
- गहरी सांस लेने का अभ्यास करिए। सांस को जितना रोक सकते हैं उतनी देर तक रोकिए। यह अभ्यास रोज करना है और इस समय को 35 से 40 सेकंड तक ले जाना है। यह दिन में कई बार कर सकते हैं।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) आयुर्वेद को बहुत बढ़ावा देता है। आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार के काम में डब्ल्यूएचओ बहुत अच्छा काम कर रहा है। संगठन में भारत के कई आयुर्वेद विशेषज्ञ भी काम कर रहे हैं।
- अनावश्यक सर्जरी से बचना बहुत जरूरी है। हमें और हमारे साथ-साथ सर्जन को भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि सर्जरी कहां जरूरी है और कहां नहीं। जब तक बहुत जरूरी न हो सर्जरी नहीं करानी चाहिए।