राहुल गांधी-प्रियंका गांधी वाड्रा (फाइल फोटो)
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इंदिरा गांधी के जमाने से राजनीति में सक्रिय और राजीव गांधी समेत तमाम नेताओं के चुनाव प्रचार में कड़ी मेहनत करने वाले सुल्तानपुर के प्रदीप पाठक का कहना है कि प्रियंका गांधी की राह बहुत आसान नहीं है। प्रदीप के अनुसार कांग्रेस पार्टी ने बहुत देर कर दी। साल-दर-साल अपने मतदाताओं को रूठने, दूसरे दलों में जाने दिया। अब पार्टी के बड़े नेता ऐसे लोगों से घिर गए हैं, जहां उन तक जमीनी लोगों की बात नहीं पहुंच पा रही है।
उदय सिंह छात्र जमाने से कांग्रेसी रहे हैं। उन्होंने इस बार भी कांग्रेस के पक्ष में प्रचार किया। उदय सिंह का कहना है कि पार्टी की जड़ों को खोजना होगा। उदय सिंह राहुल गांधी की खाट पंचायत में भी जी जान से जुटे थे। उनका कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष हर अभियान जोर-शोर से शुरू करते हैं, लेकिन उसे खाट पंचायत की तरह बीच में खत्म कर देते हैं। इससे सबसे ज्यादा निराशा धूल, धूप, चिलचिलाती गर्मी में झंडा लेकर कार्यकर्ता को होती है। वह चुपचाप खिसक जाता है।
प्रतापगढ़ के रामपूजन पटेल दिल्ली में हैं। पिछले तीन दिन से राहुल गांधी या प्रियंका गांधी से मिलने की कोशिश कर रहे हैं। इंजीनियरिंग कालेज से 2009 के बीटेक राम पूजन पटेल के पिता भी कांग्रेस पार्टी से जुड़े थे। राम पूजन भी कांग्रेसी हैं। जबकि उनके गांव के पटेल भाजपाई तथा अपना दल के हो चुके हैं। राम पूजन का कहना है कि जब वह अपने नेता से मिलने के लिए इतना पापड़ बेल रहे हैं, तो सोचिए कांग्रेस पार्टी कितना मजबूती से खड़ी रह पाएगी। बातचीत के केंद्र में कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उ.प्र. में हर जाति का अब अपना दल बन रहा है। सूबा जाति, उपजाति में बंट रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता अपनी जगह बनाए है, वहीं वोटों का ध्रुवीकरण बढ़ रहा है। ऐसे में उ.प्र. मिशन-2022 में प्रियंका के लिए बस लोहे के चने चबाने वाली बात है।